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नीट परीक्षा कैसे हो क्लीन?

देशभर के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा यानी नीट (NEET UG 2024) परीक्षा इस बार कई तरह के विवादों में घिरने के कारण सुर्खियों में है। इसके ‘नीट ऐंड क्लीन’ होने पर सवाल खड़े हो गए हैं। ऐसे में यह भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह नीट परीक्षा क्लीन हो सकेगी? और अगर हां, तो कैसे ?

सबसे पहले तो इस बार इस परीक्षा को लेकर घटी कुछ अजीबोगरीब चीज़ों पर एक नज़र डाल लेते हैं। इस बार इसका परिणाम नियत तिथि से 10 दिन पहले, यानी जिस दिन लोकसभा चुनावों के परिणाम घोषित हो रहे थे, ठीक उसी दिन चुपके से घोषित कर दिया गया। इसके अलावा, पेपर लीक होने, इक्का-दुक्का की तुलना में 67 टॉपर्स होने, असंभव स्कोर होने, करीब 1,500 छात्रों को ग्रेस मार्क्स दिए जाने, कट-ऑफ अधिक होने, एक ही कोचिंग सेंटर से आठ विद्यार्थियों के मेरिट लिस्ट में शामिल होने आदि के मामले सामने आये। 

सबसे बड़ी समस्या पेपर लीक होने की है। चूंकि मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश केवल परीक्षा के स्कोर पर ही निर्भर होता है, इसलिए भ्रष्टाचारी लोग इसमें आसान कमाई का रास्ता ढूंढ लेते हैं, खासकर तब, जब कुछ माता-पिता इसके लिए कोई भी कीमत देने के लिए तैयार रहते हैं। इसका कारण यह है कि प्राइवेट कॉलेजों की फीस की तुलना में यह कीमत फिर भी काफी कम रहती है। और कम खर्चे वाले सरकारी कॉलेजों में प्रवेश इसी परीक्षा के माध्यम से संभव होता है। इसके बाद एनटीए को प्रभावित करने की कोशिश की जाती है।

तो क्या यह सब इसी तरह से चलता रहेगा? क्या दूसरे देश, जो हमसे बेहतर विश्वसनीयता के साथ यह काम करते हैं,  हम उनसे कुछ सबक ले सकते हैं? अमेरिका में इसके लिए मेडिकल कॉलेज एडमिशन टेस्ट (एमसीएटी) आयोजित किया जाता है। इस टेस्ट की तीन मुख्य बातें ध्यान देने योग्य हैं–प्रवेश के अनेक घटक, सुरक्षा और पारदर्शिता। सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि अमेरिका में दाखिले के लिए केवल परीक्षा पर ही निर्भर नहीं रहा जाता। इसमें इसके अलावा तीन घटक और शामिल हैं। इसके लिए आवेदक को समग्र आवेदन पैकेज जमा करना होता है, जिसमें शामिल हैं-(1) निजी कथन: इसमें आवेदक अपनी अभिप्रेरणाओं, अनुभवों और गुणों को स्पष्ट करते हैं, जो उन्हें दाखिले के लिए उपयुक्त सिद्ध करें। (2) अनुशंसा पत्र: अध्यापक या स्वास्थ्य सेवा पेशेवर आवेदक के शैक्षिक निष्पादन, कार्य नैतिकता और सफल विद्यार्थी होने की संभावना के बारे में जानकारी देते हैं। (3) साक्षात्कार: इससे मेडिकल कॉलेज आवेदक के संप्रेषण कौशलों, पारस्परिक कौशलों, और पाठ्यक्रम के लिए उपयुक्तता का आकलन कर सकते हैं।

परीक्षा में धोखाधड़ी रोकने के लिए अमेरिका में कड़े प्रोटोकॉल लागू किए जाते हैं। इसमें सुरक्षित परीक्षा केंद्र स्थापित करना, नियंत्रित परीक्षा परिवेश और परीक्षा सामग्री तक अनधिकृत पहुंच को रोकने के उपाय शामिल हैं। मानकीकृत स्कोरिंग प्रणाली सभी परीक्षार्थियों का निष्पक्ष और सुसंगत मूल्यांकन सुनिश्चित करती है। इससे पेपर लीक होने और परीक्षा संस्थान को प्रभावित करने की समस्याएं दूर हो जाती हैं।

एमसीएटी संगठन विषय-वस्तु क्षेत्रों, स्कोरिंग और तैयारी के संसाधनों पर विस्तृत जानकारी के साथ समग्र परीक्षण गाइड भी देता है। एमसीएटी विषय-वस्तु और फॉर्मेट की नियमित रूप से समीक्षा की जाती है और उसे चिकित्सा शिक्षा की उभरती जरूरतों को शामिल करने के लिए अपडेट किया जाता है, ताकि भ्रम की गुंजाइश न रहे और ग्रेस मार्क्स देने की नौबत न आए। एमसीएटी संगठन संभावित पूर्वाग्रहों की पहचान करने और यह सुनिश्चित करने के लिए डाटा का विश्लेषण करता है और फीडबैक प्राप्त करता है, ताकि परीक्षा निष्पक्ष और न्यायसंगत बनी रहे।

संभवतः हम भी नीट में परीक्षा पर निर्भरता को कम करके और इसे अधिक पारदर्शी और मानक बनाकर बहुत-सी समस्याओं को दूर कर सकते हैं। इसके अलावा, इसमें राज्यों की भागीदारी रखकर, ग्रामीण विद्यार्थियों की जरूरतों पर ध्यान देकर, स्कूलों में चिकित्सा शिक्षा पर बल देकर, कॉलेजों की संख्या बढ़ाकर, और इसकी प्रक्रिया में निरंतर सुधार करके इस परीक्षा की विश्वसनीयता बढ़ा सकते हैं।  अगर हम ऐसा कर सके, तो न केवल प्रतिभावान छात्रों के साथ न्याय कर पाएंगे, बल्कि परीक्षा में कदाचार रोकने में सफल होंगे एवं भ्रष्ट तरीकों से कमाई करने वाले आपराधिक तत्वों पर भी अंकुश लगा पाएंगे। संस्थानों की विश्वसनीयता को बनाए रखना मौजूदा दौर में सबसे बड़ी चुनौती है।

Asmita Sarkar

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