
अमेरिका में विज्ञान के प्रति सरकार का रुख दिन-ब-दिन संकुचित होता जा रहा है, और यह स्थिति वैज्ञानिकों के लिए बेहद चिंताजनक है। डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के दौरान लागू किए गए कई नियमों और नीतियों ने शोध कार्यों में बाधाएं डाली हैं, और अब बहुत से वैज्ञानिक यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और एशिया में नए अवसरों की तलाश में हैं।
ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से उनके प्रशासन ने अमेरिकी सार्वजनिक स्वास्थ्य और विज्ञान एजेंसियों में बड़े पैमाने पर नौकरियों में कटौती की है। इसके अलावा, बायोमेडिकल रिसर्च फंडिंग में भी भारी कमी आई है। कई अनुदान बंद कर दिए गए हैं, खासकर वे जो ट्रंप के दृष्टिकोण या प्राथमिकताओं से मेल नहीं खाते। इसके परिणामस्वरूप, वैज्ञानिकों को यह महसूस हुआ कि सरकार उनकी मेहनत और शोध की अहमियत को नहीं समझती।
नेचर पत्रिका के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन के इस रुख का असर केवल घरेलू स्तर पर नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान पर भी पड़ने लगा है। वैज्ञानिकों को चिंता है कि यदि अमेरिका में शोध पर इस तरह के व्यवधान जारी रहे तो उसका वैश्विक विज्ञान समुदाय पर बुरा असर पड़ेगा। एक पोस्टडॉक्टरल शोधकर्ता ने कहा कि अब स्थिति बहुत तनावपूर्ण हो गई है, खासकर दक्षिण एशियाई मूल के शोधकर्ताओं के लिए, जो यूरोप में नए अवसर तलाशने लगे हैं। ट्रंप ने करीब 40 देशों के नागरिकों पर यात्रा प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे इन देशों के वैज्ञानिकों के लिए अमेरिका में काम करने के रास्ते बंद हो सकते हैं।
अमेरिका में शोध अनुदान में कमी का असर प्रमुख विश्वविद्यालयों पर भी पड़ा है, जिनमें से कोलंबिया विश्वविद्यालय विशेष रूप से प्रभावित है। यहां कैंपस में फलस्तीन के समर्थन के कारण अनुसंधान बजट में कटौती की गई है, और कई छात्रवृत्तियों को भी रोक दिया गया है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) द्वारा कोलंबिया विश्वविद्यालय को दी जाने वाली 250 मिलियन डॉलर से ज्यादा की फंडिंग को समाप्त किया जा रहा है, जिससे 400 से ज्यादा शोध परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं। यह स्थिति शोधकर्ताओं के लिए गंभीर संकट उत्पन्न कर रही है।
ट्रंप प्रशासन ने पेरिस जलवायु समझौते से भी बाहर निकलने का निर्णय लिया, जो कि वैश्विक जलवायु परिवर्तन पर एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समझौता था। इसके अलावा, वैज्ञानिकों को अपने निष्कर्षों को सार्वजनिक करने में भी प्रशासन से अवरोध का सामना करना पड़ा। उच्च-स्तरीय शोधकर्ताओं के लिए वीजा प्राप्त करना भी कठिन हो गया, जिससे अमेरिका में काम करने वाले विदेशी वैज्ञानिक यूरोप और अन्य देशों की ओर रुख करने लगे हैं।
इन सभी कारणों ने अमेरिकी वैज्ञानिकों के बीच असंतोष और चिंताओं को जन्म दिया है, और इसके परिणामस्वरूप कई वैज्ञानिक यूरोप या अन्य देशों में अपने करियर के नए अवसर तलाशने का विचार कर रहे हैं। यूरोप, विशेषकर जर्मनी, स्वीडन और अन्य देशों ने वैज्ञानिकों के लिए बेहतर शोध वातावरण और अवसर प्रदान किए हैं, जिससे कई अमेरिकी शोधकर्ता इन देशों की ओर बढ़ रहे हैं।




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