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शिक्षा और रोज़गार में नया मोड़ ला रही भारत की ‘ग्रीन इकोनॉमी’  

भारत इस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहाँ विकास और सततता (sustainability) अब साथ-साथ चल रहे हैं। ‘ग्रीन इकोनॉमी’ अब केवल एक आकर्षक शब्द नहीं रह गया, बल्कि यह रोज़गार के स्वरूप, आवश्यक कौशल और युवाओं की भविष्य दृष्टि को गहराई से बदल रहा है।

आँकड़े इस बदलाव की गवाही देते हैं। भारत में ग्रीन हायरिंग (पर्यावरण-अनुकूल नौकरियाँ) बीते दो वर्षों में 41 प्रतिशत तक बढ़ी है। 2028 तक 70 लाख से अधिक ग्रीन जॉब्स सृजित हो सकती हैं, जिनमें अक्षय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, कचरा प्रबंधन और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्र शामिल होंगे। 2047 तक यह संख्या 3.5 करोड़ तक पहुँच सकती है। ये नौकरियाँ अब सीमित क्षेत्र तक सिमटी नहीं रहेंगी, बल्कि भविष्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनेंगी।

सरकारी नीतियाँ इस परिवर्तन को गति दे रही हैं। उदाहरण के लिए, कर्नाटक की बायोफ्यूल नीति से अकेले 3 लाख नौकरियाँ पैदा होने और 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद है। राष्ट्रीय कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के कार्यक्रम युवाओं को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित कर रहे हैं। यहाँ तक कि वित्तीय क्षेत्र भी सतत दिशा में आगे बढ़ रहा है—36,000 करोड़ रुपये के ग्रीन बॉन्ड से अक्षय ऊर्जा ढाँचे का विस्तार हो रहा है।

हरित शिक्षा: असली गेम-चेंजर

इस परिवर्तन की असली कुंजी शिक्षा है। अगर यह नहीं बदली तो लाखों युवा अवसरों से वंचित रह जाएंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा (NCF) पहले ही व्यावहारिक शिक्षा, आलोचनात्मक सोच और पर्यावरणीय जिम्मेदारी पर बल दे रहे हैं। मिशन लाइफ (Mission LiFE) सततता को जीवन शैली का हिस्सा बनाने को प्रोत्साहित कर रहा है।

इस दिशा में साझेदारियाँ अहम होंगी। उद्योग जगत को सिर्फ तकनीक में ही नहीं, बल्कि कौशल निर्माण में भी निवेश करना होगा। वहीं शिक्षा को लचीला, व्यावहारिक और वास्तविक आवश्यकताओं से जुड़ा रहना होगा। भारत की ग्रीन इकोनॉमी कोई दूर का सपना नहीं, बल्कि आज ही आकार ले रही है। यदि विद्यार्थी सही तैयारी करेंगे, तो वे न केवल मौजूदा नौकरियाँ भरेंगे, बल्कि नए उद्योग रचेंगे, नीतियाँ गढ़ेंगे और टिकाऊ समाधान तैयार करेंगे।

कक्षा से भविष्य तक

भविष्य की हरित नौकरियाँ आज ही कक्षाओं, प्रयोगशालाओं और नवाचार केंद्रों में आकार ले रही हैं। हर करियर ग्रीन करियर बन सकता है, और हर विद्यार्थी के भीतर एक बदलाव लाने वाले (changemaker) बनने की क्षमता मौजूद है।

Asmita Sarkar

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