
अमेरिका में न तो भारतीय मूल के छात्रों की मौत का सिलसिला थम रहा है और न ही उनके लापता होने की घटनाएं। महज इस साल ही अब तक भारतीय मूल के कम से कम 11 छात्रों की अमेरिका में मौत हो चुकी है।
अमेरिका (USA) में पढाई करने का भारतीय छात्रों में हमेशा से एक क्रेज रहा है। लाखों की तादाद में हर साल भारत से छात्र संयुक्त राज्य अमेरिका पढ़ने के लिए जाते हैं। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक भारतीय छात्रों के लिए अमेरिका एक पसंदीदा स्थान रहा है। ओपन डोर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में भारतीय मूल के लगभग 2.75 लाख छात्र पढ़ाई करते हैं। ये छात्र हर साल फीस और बाकी चीजों में वहां करीब 9 अरब डॉलर का खर्च भी करते हैं। यही वजह है कि वहां की सरकार और यूनिवर्सिटीज खुले ह्रदय से भारतीय छात्रों का स्वागत भी करती रही हैं। अमेरिकी विश्वविद्यालयों द्वारा अंडर ग्रैजुएट और ग्रैजुएट छात्रों को भर्ती करने में भारत को सबसे ज्यादा वरीयता दी जाती है। तभी अमेरिका में पढ़ने वाले हर चार विदेशी छात्र में से एक भारतीय मूल का है। लेकिन हाल के दिनों में अमेरिका में भारतीय छात्रों के खिलाफ अपराध की घटनाओं में बढ़ोतरी से भारतीय समुदाय में डर का माहौल व्याप्त हो गया है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या भारतीय छात्रों के लिए अब अमेरिका सुरक्षित नहीं रहा ?
यह सवाल और अमेरिका में पढ़ रहे छात्रों में पसरा खौफ स्वाभाविक भी है। महज इस साल ही अब तक अमेरिका में भारतीय मूल के कम से कम 11 छात्रों की मौत हो चुकी है। और ये मौतें स्वाभाविक न होकर संदिग्ध रही हैं। भारतीय मूल के छात्रों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा। लगातार भारतीय छात्रों पर हमले, उनके गायब होने या उनकी हत्या की घटनाएं मुसलसल जारी हैं। ताज़ा घटना में एक बार फिर अमेरिका के शिकागो शहर से रुपेश चंद्रा चिंताकिंदी नाम के एक भारतीय छात्र के लापता होने की खबर आई है। वह बीती 2 मई से लापता है।
गौरतलब है कि इससे पहले मार्च में भी हैदराबाद का एक भारतीय छात्र मोहम्मद अब्दुल अरफात लापता हो गया था। बाद में अप्रैल में उसका शव ओहायो के क्लीवलैंड से बरामद हुआ था। अप्रैल में ही एक भारतीय छात्र उमा सत्य साईं गड्डे की भी मौत हो गई थी, जिसकी जांच अभी चल रही है। भारतीय छात्रों पर हमले की भी कई घटनाएं प्रकाश में आ चुकी हैं। भारतीय छात्रों के लिए अमेरिका में पढ़ना एक सपना रहा है, और इसके लिए वे पहल भी करते रहे हैं। यूँ ही नहीं पिछले शैक्षणिक सत्र में भारत से अमेरिका जाकर अपने सपने को पूरा करने वाले छात्रों की संख्या में 35 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी थी। लेकिन बीते कुछ समय से यह सपना बुरे सपने में बदलता जा रहा है। और, ऐसे में अमेरिका में भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज (FIIDS) का कहना है कि जब से संदिग्ध मौतों की घटनाएं बढ़ी हैं, तब से भारतीय अमेरिकी समुदाय के लोगों के आसपास हेट क्राइम की घटनाएं भी बढ़ी हैं। खासकर क्लीवलैंड, इलिनोइस औरइंडियाना स्टेट में। फाउंडेशन ने कहा है कि कुछ को डर है कि समुदाय के खिलाफ निगेटिव प्रोपेगेंडा से हेट क्राइम को बढ़ावा मिल रहा है। बहरहाल, अचानक बढ़ती ऐसी घटनाओं से अमेरिका में रह रहे भारतीय और भारतवंशियों में डर का माहौल है।
हालांकि FIIDS ने स्टेट डिपार्टमेंट, जस्टिस डिपार्टमेंट, एजुकेशन डिपार्टमेंट, यूनिवर्सिटीज, स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन के साथ-साथ भारतीय-अमेरिकी समुदाय को इन मौतों को लेकर कुछ सिफारिशें सौंपी हैं, भारतीय छात्रों के खिलाफ आपराधिक घटनाओं का विश्लेषण कर मौतों के संभावित कारणों का पता लगाने की कोशिश भी की है। लेकिन महज इससे भारतीय छात्रों में पसरा डर फिलहाल नहीं छंट सकता। बोस्टन में रह रहीं लक्ष्मी थलांकी ने इन मौतों का डेटा एनालिसिस कर कहा है कि भारतीय छात्रों की मौतों की बढ़ती घटनाएं चिंताजनक और संदिग्ध हैं।




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