पश्चिम बंगाल में सरकार के शिक्षा मंत्री और राज्यपाल के बीच जंग अभी ख़त्म भी नहीं हुई कि बिहार में भी राज्यपाल और शिक्षा विभाग के बीच रार छिड़ गयी है। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक ने बिहार के राज्यपाल-सह-विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है। केके पाठक ने बिहार के कुलाधिपति यानी बिहार के राज्यपाल को अपने अधिकार क्षेत्र में रहने की चेतावनी दी है। उन्होंने कुलाधिपति को विश्वविद्यालयों के कुलपति, प्रतिकुलपति की तरह अधिकारी बताते हुए लिखा है कि वह शिक्षा विभाग को आदेश नहीं दे सकते हैं।
दरअसल, कुलाधिपति के प्रधान सचिव की ओर से दिसंबर से फरवरी तक के भेजे कुछ पत्रों के जवाब में शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक ने ये बातें कही हैं। जिस अंदाज़ में उन्होंने इन पत्रों का जवाब दिया है, वह यह इशारा करता है कि वे बिहार के कुलाधिपति से सीधे भिड़ गए हैं। कुलाधिपति के प्रधान सचिव रॉबर्ट एल चोंग्थू के नाम जारी पत्र के माध्यम से केके पाठक ने उनसे पूछा है कि आप किस हैसियत से शिक्षा विभाग को पत्र लिख रहे- राज्यपाल के प्रधान सचिव या कुलाधिपति के प्रधान सचिव?
आगे उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि अगर आप राज्यपाल के प्रधान सचिव के रूप में यह पत्र लिख रहे हैं तो राज्य के सर्वोच्च पदधारक की ओर से ऐसे पत्र मुख्यमंत्री या शिक्षा मंत्री को भेजा जाना चाहिए, न कि सीधे राज्य सरकार के अधिकारी को। अगर आप कुलाधिपति के आदेश को विभाग के पास भेज रहे हैं तो शिक्षा विभाग को इस पर गंभीर आपत्ति है क्योंकि यह अनधिकृत रूप से शिक्षा विभाग के कामकाज में सीधा दखल है।
बाकायदा आईएएस अफसर केके पाठक ने नियमों का हवाला देते हुए राज्यपाल और कुलाधिपति के अधिकारों की याद दिलाई है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि बिहार विधानमंडल की ओर से पारित बिहार स्टेट यूनिवर्सिटी एक्ट 1976 के सेक्शन 7 के तहत कुलाधिपति (चांसलर) भी कुलपति, प्रतिकुलपति, डीन, प्रॉक्टर आदि की तरह विश्वविद्यालय के अधिकारी हैं और ऐसे अधिकारी शिक्षा विभाग को आदेश निर्गत नहीं कर सकते हैं।
बता दें कि कुलाधिपति ने शिक्षा विभाग की ओर से बुलाई गई बैठक में कुलपतियों को शामिल होने की अनुमति नहीं दी थी और इस सम्बन्ध में बाकायदा निर्देश भी जारी किये थे। केके पाठक ने कुलाधिपति के प्रधान सचिव चोंग्थू की ओर इस सम्बन्ध में 29 फरवरी 2024 को भेजे पत्र पर कड़ी आपत्ति दर्ज करते हुए पूछा है कि कुलाधिपति ने आखिर किस अधिकार के तहत यह रोक लगाई? यह भी पूछा है कि 21 दिसंबर 2023 के पत्र के जरिए कुलाधिपति के कार्यालय ने प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के संबंध में क्यों दखल दी? केके पाठक का साफ़ कहना है कि कुलाधिपति शिक्षा विभाग की ओर से कुलपतियों या विश्वविद्यालयों को जारी आदेशों को लेकर अपनी ओर से कोई निर्देश नहीं दे सकते हैं।
बहरहाल, केके पाठक के इस कदम को सूबे के राज्यपाल से दो-दो हाथ करने के लिए पूरी तरह खुलकर आने के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि यह अदावत आगे और बढ़ सकती है। वैसे भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के चहेते अफसरों में गिने जाने वाले केके पाठक किसी से भी लोहा लेने के लिए तैयार रहने वाले वालों में शुमार हैं। कालांतर में भी उन्होंने न सिर्फ कई बार अच्छे अच्छों से पंगा लिया बल्कि उन्हें लड़ाई में मात देकर ही शांत हुए। पिछली लड़ाई में उन्होंने महागठबंधन सरकार के शिक्षा मंत्री प्रो. चंद्रशेखर का विभाग बदलवा दिया था। फिर ठंड के कारण छुट्टी के विवाद में पटना के तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ. चंद्रशेखर के स्थानांतरण में भी उनकी ही जीत मानी गई थी। और अब वह बिहार के कुलाधिपति से सीधे भिड़ गए हैं।




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