Edinbox Hindi

कनाडा सरकार ने खत्म किया ‘फ्लैगपोलिंग’, वर्क और स्टडी परमिट के लिए अब लोग नहीं जा सकेंगे बॉर्डर के पार

कनाडा ने अपने बॉर्डर पर वर्क और स्टडी परमिट के लिए फ्लैगपोलिंग को आधिकारिक तौर पर खत्म कर दिया है। इस तरह लोग अब वर्क परमिट और स्टडी परमिट के लिए बॉर्डर के पार नहीं जा सकेंगे। कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी (CBSA) के मुताबिक, देश में टेंपरेरी रेजिडेंट स्टेटस (पढ़ने वाले विदेशी छात्र और काम करने वाले वर्कर्स) वाले विदेशी लोगों को ‘इमिग्रेशन रिफ्यूजी एंड सिटिजिनशिप कनाडा’ (IRCC) को नया ऑनलाइन आवेदन जमा करना होगा।

दरअसल, पहले लोग थोड़े वक्त के लिए देश से बाहर जाकर वापस आते थे और जल्दी परमिट पा लेते थे, इसे फ्लैगपोलिंग कहा जाता है। ऐसा करने पर इमिग्रेशन प्रोसेस तेज हो जाता था। फ्लैगपोलिंग का इस्तेमाल लंबे समय से टेंपरेरी रेजिडेंट वर्क और स्टडी परमिट के लिए होने वाले प्रोसेसिंग टाइम को बायपास करने के लिए करते रहे हैं। फ्लैगपोलिंग के तहत लोग अमेरिका जाते थे और फिर वहां कुछ वक्त गुजारकर वापस देश में आ जाते थे। इससे उन्हें जल्दी परमिट हासिल हो जाता था।

कनाडाई सरकार का कहना है कि फ्लैगपोलिंग बंद होने से बॉर्डर पर बोझ कम होगा और सुरक्षा भी बढ़ जाएगी। पब्लिक सेफ्टी मिनिस्टर डेविड मैकगिन्टी ने कहा, “इस बदलाव की वजह से बॉर्डर पर काम आसान हो जाएगा। कनाडाई और अमेरिकी बॉर्डर अधिकारी अब उन कामों को कर पाएंगे, जिनके लिए उन्हें ट्रेनिंग दी गई थी।” फ्लैगपोलिंग की वजह से कनाडा और अमेरिका दोनों देशों की बॉर्डर सर्विस पर बोझ बढ़ रहा था।

CIC न्यूज के मुताबिक, अप्रैल 2023 से मार्च 2024 के बीच, CBSA ने 69,300 से ज्यादा फ्लैगपोलिंग के मामले देखे। इनमें से ज्यादातर प्रशांत क्षेत्र, दक्षिणी ओंटारियो और क्यूबेक में थे। CBSA ने कहा है कि बॉर्डर सर्विस कनाडा में आने वाले लोगों के लिए है, न कि पहले से मौजूद लोगों के लिए। फ्लैगपोलिंग बॉर्डर पर भीड़ बढ़ाने का काम कर रहा था और इस वजह से जरूरी काम में देरी होती थी।

इमिग्रेशन मिनिस्टर मार्क मिलर ने कहा, “मजबूत कनाडा-अमेरिका संबंधों से लोग और सामान बॉर्डर पर सुरक्षित आ-जा सकते हैं और दोनों देशों की सीमा सुरक्षित रहती है।” उन्होंने कहा कि इस बदलाव से निष्पक्षता बढ़ेगी, बॉर्डर पर भीड़ कम होगी और कामकाज में सुधार होगा। कनाडा-अमेरिका बॉर्डर को मजबूत करने का काम भी किया जा रहा है। सरकार ने ड्रोन, हेलीकॉप्टर और बॉर्डर निगरानी के लिए छह साल में 1.3 बिलियन डॉलर खर्च किए हैं।

Asmita Sarkar

Add comment

Recent posts

Most popular

Most discussed