
अमेरिका में पढ़ाई का सपना लेकर पहुंचे चीन के 22 वर्षीय छात्र गू का भविष्य अचानक अधर में लटक गया। चीन से 29 घंटे की लंबी यात्रा के बाद जब वह टेक्सास एयरपोर्ट पहुंचा, तो कस्टम अधिकारियों ने उसे रोक लिया। कई घंटों की पूछताछ के बाद न केवल उसे वापस चीन भेज दिया गया बल्कि अगले पाँच साल तक अमेरिका में प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई।
36 घंटे लगातार पूछताछ
गू यूनिवर्सिटी ऑफ ह्यूस्टन में दर्शनशास्त्र की पढ़ाई करने आया था। इससे पहले वह कॉर्नेल यूनिवर्सिटी में एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत पढ़ चुका था और तब किसी दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ा था। लेकिन इस बार एयरपोर्ट पर पहुँचते ही अधिकारियों ने उसके इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खंगाले और लगातार पूछताछ शुरू कर दी।
पूछताछ का केंद्र उसके चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से कथित संबंध और चाइना स्कॉलरशिप काउंसिल से जुड़े चैट्स रहे। गू का कहना है कि उसने कभी पार्टी जॉइन नहीं की, हालांकि उसके माता-पिता सदस्य हैं। वह सिर्फ पार्टी की युवा शाखा का हिस्सा रहा है, जैसा कि चीन के अधिकांश युवा होते हैं।
“अपर्याप्त दस्तावेज़” का हवाला देकर डिपोर्ट
कस्टम अधिकारियों ने उससे 10 घंटे से अधिक पूछताछ की और बाद में “अपर्याप्त दस्तावेज़” का कारण बताते हुए डिपोर्टेशन नोटिस थमा दिया। छात्र ने आरोप लगाया कि उसे ठंडे कमरे में 40 घंटे से अधिक रखा गया, जहां नींद न मिलने और ठंड से वह लगातार कांपता रहा।
चीन की कड़ी प्रतिक्रिया
इस घटना के बाद चीन ने कड़ा विरोध जताया है। चीनी दूतावास का कहना है कि हाल ही में 10 से अधिक छात्रों और शोधकर्ताओं को इसी तरह रोका और वापस भेजा गया है। उनका आरोप है कि अमेरिकी अधिकारी चीनी छात्रों के साथ भेदभावपूर्ण और राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्रवाई कर रहे हैं।
ट्रंप प्रशासन की नीतियों में विरोधाभास
घटना पर सवाल यह भी उठ रहा है कि अमेरिकी प्रशासन का रुख असंगत क्यों है। हाल ही में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने “हजारों चीनी छात्रों का स्वागत करने” की बात कही थी, जबकि हकीकत यह है कि एयरपोर्ट पर चीनी छात्रों के साथ सख्ती बरती जा रही है।
करियर पर संकट
गू अब अपील करने पर विचार कर रहा है, लेकिन यह प्रक्रिया वर्षों तक चल सकती है और इसमें भारी खर्च भी होगा। फिलहाल, उसका अमेरिका में पढ़ाई और करियर बनाने का सपना अनिश्चित भविष्य की ओर धकेल दिया गया है।




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