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ऑक्सफोर्ड में अध्ययन के लिए भारतीय छात्रों को मिलेंगी ज़्यादा रोड्स छात्रवृत्तियाँ, 2028 से होगा विस्तार

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में अध्ययन के लिए दी जाने वाली प्रतिष्ठित रोड्स छात्रवृत्ति की संख्या 2028 से भारतीय छात्रों के लिए बढ़ाई जाएगी। रोड्स ट्रस्ट के सीईओ और रोड्स हाउस के अंतरिम वार्डन, सर रिचर्ड ट्रेनर ने भारत दौरे के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह निर्णय भारत की विशाल जनसंख्या को देखते हुए अधिक योग्य उम्मीदवारों को अवसर देने के उद्देश्य से लिया गया है।

वर्तमान में भारत को मिलती हैं 6 छात्रवृत्तियाँ प्रति वर्ष
फिलहाल भारत के लिए हर साल केवल छह छात्रवृत्तियाँ उपलब्ध हैं। सर ट्रेनर ने कहा, “हमारी प्राथमिकता उन क्षेत्रों में अतिरिक्त छात्रवृत्तियाँ देना है जहाँ प्रति व्यक्ति छात्रों की संख्या अधिक हो सकती है, और भारत इनमें प्रमुख है।” ट्रस्ट अब इन अतिरिक्त छात्रवृत्तियों के लिए धन जुटाने के प्रयास में जुटा है, क्योंकि रोड्स छात्रवृत्ति में छात्रों की ट्यूशन फीस के साथ-साथ रहने का खर्च भी शामिल होता है।

भारत के प्रतिष्ठित रोड्स स्कॉलर
अब तक भारत से कई जानी-मानी हस्तियाँ यह सम्मानजनक छात्रवृत्ति प्राप्त कर चुकी हैं, जिनमें प्रमुख हैं –
मोंटेक सिंह अहलूवालिया (अर्थशास्त्री)
गिरीश कर्नाड (लेखक और अभिनेता)
लावण्या राजमणि (पर्यावरण कानून विशेषज्ञ)
महेश रंगराजन (राजनीतिक विश्लेषक)
रंजीत भाटिया (ओलंपिक एथलीट)

दुनिया की सबसे पुरानी अंतरराष्ट्रीय छात्रवृत्तियों में से एक
1903 में शुरू हुई रोड्स छात्रवृत्ति को दुनिया की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय ग्रेजुएट फेलोशिप्स में गिना जाता है। यह छात्रवृत्ति 2 से 3 वर्ष की अवधि के लिए ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में अध्ययन के लिए प्रदान की जाती है। यह सामान्यतः 18 से 23 वर्ष के छात्रों के लिए खुली होती है, हालांकि विशेष मामलों में 27 वर्ष तक के उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं।

2026 सत्र के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू
रोड्स छात्रवृत्ति के 2026 के शैक्षणिक सत्र के लिए आवेदन 3 जून से शुरू हो चुके हैं और 23 जुलाई तक खुले रहेंगे।

चीन और अफ्रीका भी रोड्स ट्रस्ट की योजना में शामिल
भारत के अलावा, चीन और अफ्रीका जैसे देशों में भी छात्रवृत्तियों की संख्या बढ़ाने की योजना है। वर्तमान में चीन के चार और अफ्रीका से 21 छात्र इस छात्रवृत्ति के अंतर्गत चयनित होते हैं। ट्रस्ट का लक्ष्य है कि 2028 तक इन देशों में भी अवसरों का विस्तार किया जाए।

 

Asmita Sarkar

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