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कानून लागू हुआ नहीं, ढाई करोड़ छात्रों की बन गई अपार आईडी

केंद्र सरकार ने नई शिक्षा नीति लागू करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर छात्रों का पंजीयन करने की योजना तैयार की है। हालांकि केंद्र सरकार ने अभी तक इस सम्बन्ध में कानून को लागू नहीं किया है, न ही गाइडलाइन तैयार की है। बावजूद इसके ऑटोमेटिक परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री (अपार) में ढाई करोड़ छात्रों के पंजीयन कर दिए गए। यह बात निकलकर तब सामने आई, जब इस संबंध में सूचना अधिकार कानून के तहत जानकारी मांगी गई। 

दरअसल, शिक्षा विभाग द्वारा अभी तक अपार को लेकर नीतिगत ढांचा और गाइडलाइन तैयार नहीं किया गया है। ढाई करोड़ छात्रों के डाटा को संरक्षित करने के लिए कोई विशेष प्रावधान भी नहीं हैं। देश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों के छात्रों का 12 डिजिट की आईडी बनाकर उनकी एकेडमिक उपलब्धियां का डेटाबेस तैयार करने की योजना ज़रूर है। लेकिन केंद्र सरकार ने अभी कानून ही लागू नहीं किया है। ना ही कानून के अंतर्गत गाइडलाइन तैयार की गई है। उसके बाद भी छात्रों का पंजीयन कराया जा रहा है। 

18 साल से कम उम्र के बच्चों का भी पंजीयन किया जा रहा है जबकि इसके लिए अभिभावकों की अनुमति लेना आवश्यक है। अपार आईडी को आधार से जोड़ने की बात कहीं जा रही है जबकि कानून में इसे स्वैच्छिक रखा गया है। अभी तक कोई स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसके बाद भी ढाई करोड़ छात्र-छात्राओं का डाटा अपार आईडी में पंजीकृत किया गया है। इसका बड़े पैमाने पर दुरुपयोग भी हो सकता है। 

बता दें कि आधार कार्ड की ही तरह सरकार बच्चों के लिए एक और कार्ड बनाने जा रही है। ये आने वाले समय में उनकी स्कूल की पढ़ाई-लिखाई से लेकर कालेज में प्रवेश लेने और नौकरी ढूंढने तक में मदद करेगा। इसका नाम सरकार ने ‘अपार आइडी कार्ड’ रखा है। ‘अपार कार्ड’ का पूरा नाम ‘स्वचालित स्थायी शैक्षणिक खाता रजिस्ट्री (Automated Permanent Academic Account Registry)’ है। इसका मतलब सरकार बच्चों का 12 अंकों का एक ऐसा आइडी कार्ड बनाएगी, जो बचपन से लेकर उनकी पढ़ाई खत्म होने तक स्थायी रहेगा। उनके स्कूल बदलने पर भी उनकी ‘अपार आइडी’ एक ही रहेगी। ये उनके आधार कार्ड से अलग होगा और आपस में लिंक होगा। इसमें उनकी सभी जानकारी स्वयं से बदलती जाएंगी।

‘अपार कार्ड’ छात्र-छात्राओं को उनके स्कूल या कालेज जारी करेंगे। इसके लिए पंजीकरण बच्चों के माता-पिता की सहमति से होगा। माता-पिता किसी भी समय अपनी सहमति को समाप्त भी कर सकते हैं। स्कूल और कालेज के विद्यार्थियों को एक आवेदन पत्र दिया जाएगा, जिसे वे अपने माता-पिता से भरवाकर जमा कर सकते हैं। अभिभावकों की सहमति के बाद ही स्कूल या कालेज बच्चों का ‘अपार कार्ड’ बना सकेंगे। 

Asmita Sarkar

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