
नीट यूजी (NEET UG) और यूजीसी नेट (UGC NET) परीक्षाओं को लेकर मचे बवाल के बीच संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी (UPSC) ने अब एआई आधारित सीसीटीवी से परीक्षा की निगरानी का फैसला किया है। परीक्षाओं में नकल और धोखाधड़ी को रोकने के लिए इसके अलावा भी उसने कई और सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है। इनमें आधार आधारित फिंगर प्रिंट वेरिफिकेशन से लेकर ई-एडमिट कार्ड की क्यूआर कोड स्कैनिंग तक शामिल है।
बता दें कि संघ लोक सेवा आयोग हर साल करीब 23 अलग-अलग परीक्षाएं आयोजित करता है जिनमें 26 लाख से ज्यादा उम्मीदवार हिस्सा लेते हैं। हर साल करीब 10 लाख अभ्यर्थी तो यूपीएससी की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में ही शामिल होते हैं। देश की प्रशासनिक व्यवस्था को संभालने वाले आईएएस-आईपीएस का चयन सिविल सेवा परीक्षा के जरिए ही होता है। इसके अलावा यह केंद्र सरकार के ग्रुप ‘ए’ और ग्रुप ‘बी’ पदों पर भर्ती के लिए हर साल कई भर्ती परीक्षाएं, साक्षात्कार भी आयोजित करता है। इसलिए, यूपीएससी ने विभिन्न परीक्षाओं में नकल और धोखाधड़ी को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने का फैसला लिया है।
इस कड़ी में हाल ही में, अनुभवी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से दो तकनीकी समाधान तैयार करने के लिए बोलियां आमंत्रित की गई हैं। पहला आधार आधारित फिंगर प्रिंट प्रमाणीकरण और दूसरा उम्मीदवारों की चेहरे की पहचान और ई-एडमिट कार्ड की क्यूआर कोड स्कैनिंग है। इन दोनों तकनीकों का इस्तेमाल परीक्षा प्रक्रिया के दौरान किया जा सकता है। इसके अलावा परीक्षा के दौरान लाइव एआई-आधारित सीसीटीवी निगरानी सेवा का इस्तेमाल किया जाएगा।
यूपीएससी ने कहा कि उसने सुरक्षित वातावरण में देशभर में विभिन्न केंद्रों/स्थलों पर आयोग की परीक्षाएं आयोजित करने के लिए उम्मीदवारों और अन्य व्यक्तियों की विभिन्न गतिविधियों पर नजर रखने के लिए रिकॉर्डिंग और लाइव प्रसारण प्रणालियों के साथ सीसीटीवी/वीडियो निगरानी लागू करने का निर्णय लिया है।
यूपीएससी ने कहा कि सेवा प्रदाता प्रत्येक परीक्षा हॉल/कक्ष में प्रत्येक 24 अभ्यर्थियों के लिए एक सीसीटीवी कैमरा लगाएगा, “इस शर्त के अधीन कि प्रत्येक कमरे में कम से कम एक सीसीटीवी कैमरा स्थापित किया जाएगा, भले ही अभ्यर्थियों की संख्या 24 से कम हो।”
एआई-आधारित वीडियो सिस्टम को “यदि परीक्षा के दौरान प्रवेश/निकास द्वार पर कोई हलचल देखी जाती है” और “यदि कक्षाओं के अंदर फर्नीचर ठीक से व्यवस्थित नहीं है” तो अलर्ट उत्पन्न करने में भी सक्षम होना चाहिए। इसमें कहा गया है कि एआई को उन घटनाओं पर अलर्ट करना चाहिए जो धोखाधड़ी, अनुचित साधनों, निरीक्षकों की अनुपस्थिति आदि का संकेत देती हैं।




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