
शिक्षा मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) द्वारा परीक्षाओं का पारदर्शी और सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति का नेतृत्व कर रहे इसरो के पूर्व अध्यक्ष के राधाकृष्णन ने कहा है कि समिति की पहली प्राथमिकता अभिभावकों और छात्रों से उनकी चिंताओं और सुझावों को जानना होगा। सात सदस्यीय समिति ने अपनी पहली बैठक में अगले दो सप्ताह में प्राप्त सुझावों को समेकित करने का भी निर्णय लिया है।
राधाकृष्णन ने मीडिया को बताया, “हमारे लिए पहली प्राथमिकता देश भर के छात्रों और अभिभावकों से व्यक्तिगत रूप से या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से मिलना और उनकी चिंताओं और सुझावों को जानना है। और अगले पखवाड़े में हम उनसे प्राप्त सुझावों को समेकित भी करना चाहेंगे।”
उन्होंने कहा, “हमारी अगली प्राथमिकता परीक्षा शुरू करने के लिए शीघ्रता से एक मजबूत प्रणाली का निर्माण करना है। ऐसी प्रणाली जो मजबूत और पूरी तरह सुरक्षित हो। साथ ही जो पर्याप्त लचीलेपन के साथ छात्रों की कठिनाइयों और तनाव को कम करे।” इस समिति को तीन पहलुओं- परीक्षा प्रक्रिया की प्रणाली में सुधार, डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल में सुधार तथा एनटीए की संरचना और कार्यप्रणाली, पर सिफारिशें करने का काम सौंपा गया है।
गौरतलब है कि शिक्षा मंत्रालय ने बीते शनिवार को इसरो के पूर्व अध्यक्ष के राधाकृष्णन के नेतृत्व में इस उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था। इसमें एम्स दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया, हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर बीजे राव, आईआईटी मद्रास के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर एमेरिटस प्रोफेसर राममूर्ति के, पीपलस्ट्रॉन्ग के सह-संस्थापक और कर्मयोगी भारत के बोर्ड सदस्य पंकज बंसल, आईआईटी दिल्ली के छात्र मामले के डीन प्रोफेसर आदित्य मित्तल और शिक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव गोविंद जायसवाल शामिल हैं ।समिति दो महीने के भीतर मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।




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