
दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi University) ने मार्कशीट और डिग्री प्रमाणपत्रों में सुधार के लिए शुल्क में की गई बढ़ोतरी को वापस ले लिया है। अकादमिक परिषद के सदस्यों ने पिछले महीने शुल्क मे वृद्धि के फैसले का विरोध किया था। इन आपत्तियों के मद्देनज़र कुलपति योगेश सिंह द्वारा अनुमोदित शुल्क वृद्धि के फैसले को वापस ले लिया गया।
बता दें कि डीयू में डिग्री और मार्कशीट में त्रुटि सुधार करने की फीस को बढ़ाने का प्रस्ताव लाया गया था। इसके तहत स्नातक की उपाधि प्राप्त करने के छह साल के भीतर मार्कशीट और डिग्री में सुधार कराने वालों के लिए शुल्क 500 रुपये से बढ़कर 1,000 रुपये हो गया था और छह साल से अधिक की अवधि के लिए शुल्क 1,000 रुपये से बढ़कर 2,000 रुपये हो गया था। शिक्षकों के विरोध के बाद इसे घटाकर पांच सौ और एक हजार रुपये कर दिया गया है।
शुक्रवार को आयोजित दिल्ली विश्वविद्यालय अकादमिक परिषद की बैठक के दौरान फीस वृद्धि के साथ-साथ अन्य मदों पर कार्रवाई रिपोर्ट एसी के समक्ष पेश की गई, ताकि उन्हें कुलपति द्वारा अपने विशेष अधिकारों का प्रयोग करके पहले से पारित प्रस्तावों के बारे में अवगत कराया जा सके। शिक्षकों ने दावा किया कि उनके विरोध के कारण प्रशासन को स्वीकृत प्रस्ताव में संशोधन करना पड़ा।
इसके अलावा, परिषद ने कई प्रस्तावों को मंजूरी दी, जिसमें विधि संकाय में एलएलबी छात्रों के लिए 1 जुलाई से लागू हुए तीन नए आपराधिक कानूनों पर पाठ्यक्रम शुरू करना, रूसी भाषा में बीए (ऑनर्स) पर एक कार्यक्रम शुरू करना और छात्रों को एक साथ दो डिग्री हासिल करने की अनुमति देना शामिल है। बयान में कहा गया है कि विश्वविद्यालय में डॉ बीआर अंबेडकर चेयर स्थापित करने का प्रस्ताव यूजीसी को मंजूरी के लिए भेजा गया है।
परिषद ने हिंदू अध्ययन केंद्र में छात्रों के लिए ‘वैदिक साहित्य का परिचय’, ‘उपनिषद परिचय’, ‘धर्म और धर्म’, ‘हिंदू विचारक’, ‘मानवता के लिए भगवद गीता और ‘पुराण परिचय’ शीर्षक वाले 6 वैकल्पिक पेपर शुरू करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी।




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