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स्कूलों में पढ़ाया जायेगा ईस्ट बंगाल, मोहन बागान और मोहम्मडन स्पोर्टिंग क्लब का इतिहास

पश्चिम बंगाल में इस साल से स्कूलों में ईस्ट बंगाल, मोहन बागान और मोहम्मडन स्पोर्टिंग क्लब का इतिहास पढ़ाया जायेगा। राज्य की स्कूली शिक्षा में पाठ्यपुस्तकों में इन तीन खेल क्लबों के योगदान का विस्तार से उल्लेख किया गया है। इन तीनों क्लबों ने भारतीय फुटबॉल के इतिहास में बहुत योगदान दिया है। इतना ही नहीं, कोलकाता के ये तीन प्रमुख क्लब स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ीं विभिन्न घटनाओं से भी जुड़े हुए हैं। 

अलग-अलग समय में इन तीन क्लबों के लिए खेलने वाले उल्लेखनीय खिलाड़ियों के नाम भी पाठ्यपुस्तक में शामिल हैं। चालू शैक्षणिक वर्ष से छात्र स्कूल में तीन क्लबों का इतिहास पढ़ेंगे। इन तीनों क्लबों का इतिहास 11वीं कक्षा में शामिल है। यह जानकारी देते हुए उच्च माध्यमिक शिक्षा परिषद के अध्यक्ष डॉ चिरंजीव भट्टाचार्य ने बताया कि छात्रों को आजादी से पहले और बाद में, इन तीन क्लबों के योगदान के बारे में जानना होगा, इसलिए हमने इन तीन क्लबों का इतिहास पाठ्यपुस्तक में जोड़ा है। 

आइएफए शील्ड से लेकर विभिन्न ट्रॉफी जीतने तक मोहन बागान का इतिहास पाठ्यपुस्तक में शामिल है। वर्ष 1911 में मोहन बागान स्पोर्टिंग क्लब की आइएफए शील्ड जीत से जुड़े खिलाड़ियों के नाम चित्रों के साथ पाठ्यपुस्तक में विस्तार से उल्लिखित हैं। इस नयी पहल से बच्चों को फुटबॉल की अहम जानकारी हासिल होगी।

मोहन बागान के सचिव देबाशीष दत्ता ने कहा, “मैं इस फैसले के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को धन्यवाद देता हूं। मैं शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु को भी इसका श्रेय देता हूं। अगर मोहन बागान को इतिहास की किताबों में शामिल किया जाता है तो नई पीढ़ी को इसके योगदान के बारे में और अधिक जानकारी मिलेगी। आप फुटबॉल और फुटबॉल के मैदान से समाज पर इन तीन टीमों के प्रभाव के बारे में भी जानेंगे।”

दत्ता ने कहा, “आप स्वतंत्रता संग्राम में मोहन बागान के योगदान के बारे में जानेंगे। यह ग्यारहवीं कक्षा में होगा। वर्तमान पीढ़ी मैनचेस्टर यूनाइटेड और रियल मैड्रिड के प्रति जुनूनी है। ये तीन क्लब केवल क्लब नहीं बल्कि संस्थाएं हैं। इसके बारे में जानना और जानकारी देना महत्वपूर्ण है।”

 

 

Asmita Sarkar

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