
प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी (ED) ने भ्रष्टाचार के संगीन मामलों से घिरे चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के पूर्व कुलपति रामपाल सिंह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है।
ईडी की लखनऊ स्थित जोनल इकाई ने मनी लांडरिंग मामले में वर्ष 2004 में सीपीएमटी प्रवेश परीक्षा में धांधली के आरोपों में फंसे पूर्व कुलपति रामपाल सिंह की 3.21 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की हैं। यह संपत्तियां रामपाल सिंह के ट्रस्ट आरपी सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट से भी संबंधित हैं। जब्त की गई संपत्तियों में बरेली में स्थित दो मंजिला मकान और बदायूं में स्थित कृषि भूमि शामिल है। इस मामले में विश्वविद्यालय में कार्यरत रहे और उसी मामले से जुड़े और लोग भी ईडी के शिकंजे में आ सकते हैं।
यह मामला 21 सितंबर 2020 को उत्तर प्रदेश विजिलेंस पुलिस ने दर्ज किया था जिसमें विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति रामपाल सिंह के अलावा पूर्व वित्त नियंत्रक चंद्र किरण सिंह और सीपीएमटी परीक्षा 2004 के पूर्व समन्वयक प्रोफेसर हरेंद्र सिंह बालियान को आरोपित बनाया गया है।
रामपाल सीसीएसयू में दो मार्च 2003 से 27 मई 2005 तक कुलपति रहे थे। उनके पद पर रहने के दौरान ही उनके खिलाफ हुई शिकायतों के बाद विश्वविद्यालय से लेकर पुलिस तक की जांच हुई। बाद में विजिलेंस ने मनी लांडरिंग का मामला दर्ज किया जिसकी जांच अब ईडी कर रही है।
ईडी ने रामपाल सिंह के खिलाफ सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) मेरठ द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। विजिलेंस ने उनके खिलाफ जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें वह वर्ष 2003 से 2005 के बीच तमाम अनियमितताएं करने के दोषी पाए गए थे। विजिलेंस द्वारा दाखिल रिपोर्ट में उन्हें सीपीएमटी-2004 में हुई प्रवेश परीक्षा में धांधली करने का आरोपी पाया गया था। साथ ही दैनिक वेतनभोगी कर्मियों की भर्ती में भी अनियमितताएं पाई गई थीं।
मामले की जांच के लिए ईडी ने विश्वविद्यालय ने तीनों आरोपितों के आधार कार्ड व पैन कार्ड की छाया प्रति, सैलरी एकाउंट के विवरणों में खाता संख्या, बैंक का नाम व शाखा, जनवरी 2003 से अप्रैल 2024 तक उन्हें दिए गए वेतन का महीने वार विवरण, उक्त समय के दौरान ही तीनों के द्वारा इम्मोवेबल प्रापर्टी रिटर्न में घोषित विवरण, विश्वविद्यालय में व्याप्त तीनों के किसी भी अन्य ऐसेट व लायबिलिटी के विवरण, तीनों की वर्तमान पोस्टिंग का विवरण, विश्वविद्यालय की ओर से की गई जांच की प्रतियां व रिपोर्ट भी और तीनों की ओर से धनराशि को लेकर की गई अनियमितताओं का विवरण भी मांगा था।




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