
बांग्लादेश में एक बार फिर छात्र सड़कों पर उतर आए हैं और जगह-जगह प्रदर्शन कर रहे हैं। बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना की सरकार ने माफी मांगने के अल्टीमेटम को नजरअंदाज कर दिया है, जिसके बाद छात्र आपे से बाहर हो गए हैं और सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। छात्रों का कहना है कि देश में अशांति की वजह से मारे गए लोगों के लिए सरकार को माफी मांगना चाहिए। छात्र अपने नेताओं की रिहाई की भी मांग कर रहे हैं। सरकार ने प्रदर्शन करने वाले छात्र नेताओं को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
छात्रों ने देश में अशांति के लिए सरकार को माफी मांगने के लिए कहा था, जिसे सरकार ने नंजरअंदाज कर दिया। इसके बाद छात्रों ने फिर प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। इससे पहले बांग्लादेश सरकार ने पहली बार माना कि अशांति में देशभर में करीब 150 लोग मारे गए हैं। सरकार ने राष्ट्रव्यापी शोक की घोषणा की है। हाल ही में बांग्लादेश में हिंसा भड़क उठी थी और सरकार ने नौकरी में आरक्षण के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन को दबाने के लिए सेना बुला ली थी। इस महीने की शुरुआत में यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में विरोध-प्रदर्शन शुरू हुआ और फिर पीएम शेख हसीना और उनकी सरकार के खिलाफ व्यापक आंदोलन में बदल गया। अशांति में पुलिसकर्मियों समेत हजारों लोग घायल हुए हैं और प्रमुख सरकारी प्रतिष्ठान क्षतिग्रस्त हो गए हैं। मोबाइल इंटरनेट और प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बंद कर दिए गए थे, हालांकि अब देश में इंटरनेट सेवाएं बहाल कर दी गई हैं।
इस बीच, बांग्लादेश में एक बड़े घटनाक्रम में सत्ताधारी अवामी लीग के नेतृत्व वाली 14 पार्टियों के गठबंधन ने कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी पर बैन लगाने का फैसला किया है। जमात के साथ ही इसकी शाखा छात्र शिबिर को भी बैन किया जाएगा। जमात-ए-इस्लामी और छात्र शिबिर पर बीते दिनों बांग्लादेश में हुए छात्र प्रदर्शन को हाईजैक करने और हिंसा फैलाने का आरोप है, जिसमें 200 से ज्यादा लोग मारे गए थे।
रिपोर्ट में बताया गया था कि आईएसआई से समर्थित जमात-ए-इस्लामी ने आंदोलन को अगवा कर लिया था, जिसके कारण हिंसा और आगजनी हुई। इसके पहले जमात को बांग्लादेश के चुनाव में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया था। बांग्लादेश के स्वतंत्रता आंदोलन का जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व ने विरोध किया था। उसने 1971 में पाकिस्तानी सेना का साथ दिया था। अक्टूबर 2018 में हाईकोर्ट के एक फैसले के बाद बांग्लादेश के चुनाव आयोग ने जमात-ए-इस्लामी का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया था।
सोमवार रात पीएम आवास पर हुई एक बैठक में जमात-ए-इस्लामी पर बैन लगाने का फैसला लिया गया। बैठक की अध्यक्षता अवामी लीग की अध्यक्ष और प्रधानमंत्री शेख हसीना ने की। बैठक के बाद अवामी लीग के महासचिव ओबैदुल कादर ने फैसले के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि गठबंधन ने आम लोगों की हत्या करने और कई मुद्दे बनाकर आतंकवादी हमले करके राज्य की संपत्ति को नष्ट करने के आरोप में जमात-शिबिर पर प्रतिबंध लगाने पर सहमति जताई है। बीएनपी और जमात देश में अराजकता पैदा करने की साजिश कर रहे हैं।




Add comment