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खाली बची सीटों को भरने के लिए खुद की प्रवेश परीक्षा आयोजित कर सकते हैं विश्वविद्यालय; यूजीसी ने दी अनुमति

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यांनी यूजीसी (UGC) ने विश्वविद्यालयों को स्नातक और स्नातकोत्तर कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए अपनी स्वयं की प्रवेश परीक्षा आयोजित करने की अनुमति दे दी है। आयोग ने कहा है कि यदि प्रवेश के नियमित दौर के बाद सीटें रिक्त रह जाती हैं, तो विश्वविद्यालय स्वयं की प्रवेश परीक्षा आयोजित कर सकते हैं।

यह कदम इलाहाबाद विश्वविद्यालय जैसे विश्वविद्यालयों की शिकायतों के बीच उठाया गया है। इन शिकायतों में कहा गया है कि उन्हें सीयूईटी (CUET) में भाग लेने के लिए “मजबूर” किया जा रहा है और साल-दर-साल प्रवेश में देरी और सीटें खाली रहने के बावजूद अलग से परीक्षा आयोजित करने की अनुमति नहीं दी जा रही है।

गौरतलब है कि तीन वर्षों से, देशभर के विश्वविद्यालय कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट के माध्यम से अपने यूजी और पीजी कार्यक्रमों में छात्रों को प्रवेश दे रहे हैं, जिसकी शुरुआत 2022 में हुई थी। कोविड से पहले जब प्रवेश परीक्षा शुरू नहीं हुई थी और छात्रों को उनके कक्षा 12वीं के अंकों के आधार पर प्रवेश दिया जाता था, तब शैक्षणिक सत्र जुलाई के महीने में शुरू होता था। इस साल अगस्त में ही प्रवेश शुरू होने के कारण यह निर्णय कॉलेज प्रवेश के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।

बता दें कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) ने हाल ही में सीयूईटी यूजी परिणाम की घोषणा की और कुछ भाग लेने वाले केंद्रीय, राज्य और निजी विश्वविद्यालय प्रवेश आयोजित करने की प्रक्रिया में हैं।

यूजीसी के चेयरमैन ममीडाला जगदीश कुमार ने सोशल मीडिया पर कहा कि विश्वविद्यालयों को सीयूईटी स्कोर का उपयोग करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) प्रदान की गई है जिसमें कई प्रवेश दौर शामिल हैं। यदि काउंसलिंग के कई दौर और पात्रता मानदंडों में छूट के बाद भी सीटें खाली रहती हैं, तो विश्वविद्यालय एसओपी के अनुसार उन्हें भरने के लिए अपने स्तर पर अलग से प्रवेश परीक्षा आयोजित कर सकते हैं।

 

Asmita Sarkar

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