
छात्रों में पढ़ने की आदत को विकसित करने में मदद करने के लिए कर्नाटक सरकार के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (DSEL) ने राज्य के सभी स्कूलों में हर हफ्ते एक लाइब्रेरी पीरियड तय करने का निर्देश दिया है। इस पीरियड में छात्र अपनी रूचि के अनुसार स्कूल की लाइब्रेरी का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह निर्देश पहली कक्षा से दसवीं कक्षा तक के सभी छात्रों पर लागू होगा।
पढ़ने की आदत और ज्ञान विकास कार्यक्रम के तहत छात्रों को कॉमिक्स, कविता, लोकगीत, गैर-काल्पनिक और काल्पनिक कथाओं जैसी अलग-अलग विधाओं की पुस्तकों का अध्ययन करने का अवसर प्राप्त होगा। इससे पहले, लाइब्रेरी पीरियड स्कूल के बुनियादी ढांचे के आधार पर स्कूल की समय सारिणी का हिस्सा थे, लेकिन अब इसे राज्य बोर्ड के स्कूलों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है।
इस सम्बन्ध में जारी परिपत्र में कहा गया है कि “पढ़ने से बच्चों की शब्दावली, प्रवाह, समझ, एकाग्रता, भाषा और रचनात्मक लेखन में सुधार होगा। यह आलोचनात्मक सोच, तर्क, विश्लेषणात्मक क्षमता, संक्षेपण, कल्पना, रचनात्मकता और सहानुभूति जैसे बौद्धिक कौशल भी विकसित करने का काम करेगा।”
विभाग ने इस बात पर प्रकाश डाला कि स्कूलों को समग्र शिक्षा कर्नाटक (एसएसके) द्वारा प्रतिवर्ष दिए जाने वाले पुस्तकालय अनुदान और छात्रों द्वारा एकत्रित रीडिंग रूम (आरआर) निधि के तहत उपलब्ध अनुदान का उपयोग करना चाहिए।
परिपत्र में कहा गया है, “इन अनुदानों का उपयोग करके, पुस्तकालयों को शैक्षणिक वर्ष के दौरान बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण पठन सामग्री खरीदनी चाहिए। डीएसईएल ने प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और उच्च विद्यालयों के लिए गुणवत्तापूर्ण पुस्तकों की एक सूची की अनुशंसा की है। स्कूल आवश्यक पुस्तकों का चयन और खरीद कर सकते हैं।”
कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों को एक पाठक के रूप में विकसित करने में मदद करने के लिए, स्कूल के शिक्षकों से पढ़ने की गतिविधियाँ आयोजित करने का आग्रह किया गया है। शिक्षकों के लिए इस दिशा में इशारों से पढ़ना, साथियों के साथ पढ़ना, समूह में पढ़ना, पढ़ने के बाद की गतिविधियाँ समेत कई गतिविधियों का सुझाव दिया गया है।




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