
दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस कार्रवाई से नाखुश होकर ओल्ड राजेंद्र नगर कोचिंग सेंटर हादसे की जांच सीबीआई को सौंप दी है। जज ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हम जांच सीबीआई को ट्रांसफर कर रहे हैं। अदालत ने हादसे पर अब तक की जांच पर नाराजगी जताते हुए दिल्ली पुलिस को खूब खरी-खोटी सुनाई। जज ने कहा कि अगर आपको एमसीडी से फाइल नहीं मिल रही है तो फिर आप उनके ऑफिस में जाकर फाइल जब्त कर लीजिए।
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा, ‘सड़क से गुजर रहे व्यक्ति को कैसे गिरफ्तार किया गया? पुलिस का सम्मान तब होता है जब आप अपराधी को गिरफ्तार और निर्दोष को छोड़ देते हैं। आप निर्दोष को गिरफ्तार करेंगे और दोषी को छोड़ देंगे, तो यह बहुत दुखद होगा।’
दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले को लेकर शुक्रवार को हुई सुनवाई में दिल्ली पुलिस, दिल्ली सरकार और एमसीडी को कोर्ट के भारी गुस्से का सामना करना पड़ा। आलम यह रहा कि कोर्ट को कहना पड़ा कि सिर्फ आदेश पारित हो रहा है, उस पर अमल कोई नहीं कर रहा।
एमसीडी को फटकार लगाते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि हम तो बस आदेश पारित करते हैं, लेकिन आप लोग उस पर अमल तक नहीं करते। एक आदेश ऐसा नहीं है जिसका पालन हुआ हो। आपके विभाग में तो कानून का कोई सम्मान ही नहीं है। कोर्ट ने एमसीडी को तो फटकार लगाई ही, उन अधिकारियों को भी नहीं बख्शा जो ओल्ड राजेंद्र नगर में मौजूद थे।
कोर्ट ने दो टूक कहा कि जिन अधिकारियों को सुपरविजन करने को कहा गया है, वो अपने ऑफिस से बाहर तक नहीं झाकते। अगर किसी नाले की मरम्मत हो भी रही थी, कुछ तो करना चाहिए था। इन अधिकारियों को कोई जानकारी क्यों नहीं थी। इस मानसून में भारी बारिश की संभावना तो पहले ही जता ती गई थी, फिर भी कोई एक्शन नहीं, यह समझने के लिए कोई वैज्ञानिक होने की जरूरत नहीं है।
कोर्ट ने उन पुलिस अधिकारियों को भी आड़े हाथों लिया जिन्होंने अभी तक सही तरह से जांच नहीं की है। कोर्ट ने सवाल किया है कि आखिर दिल्ली पुलिस सच के साथ कब खड़ी होगी। वो इस बात की जांच कब करेगी कि आखिर बेसमेंट में कोचिंग चलाने की मंजूरी किसने दी थी। जानकारी के लिए बता दें कि इस मामले में अभी भी छात्रों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। अभी भी न्याय की गुहार लगाई जा रही है, लापरवाही के आरोप लग रहे हैं।




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