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छात्रों को मदरसों से सरकारी स्कूलों में भेजने के यूपी सरकार के आदेश की जमाअत-ए-इस्लामी ने की निंदा, बताया गैर कानूनी 

जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने उत्तर प्रदेश में मदरसों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में शिफ्ट करने के आदेश को गैर कानूनी और मदरसों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। संगठन ने कहा है कि धार्मिक शिक्षा न केवल प्रत्येक व्यक्ति का मौलिक अधिकार है बल्कि एक बेहतर समाज के लिए आवश्यकता भी है। ऐसी स्थिति में, न तो सरकार और न ही सरकारी संस्थानों को यह नैतिक और संवैधानिक अधिकार है कि वे इस्लामी मदरसों में अपनी मर्जी से पढ़ रहे छात्रों को जबरन हटाकर दूसरे नियमित स्कूलों में स्थानांतरित कर दें। 

जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 30(1) के तहत, अल्पसंख्यकों को अपने स्वयं के शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और प्रबंधन करने का मौलिक अधिकार है। इसी तरह, आरटीई अधिनियम ने भी मदरसों को अपनी व्यवस्था स्वतंत्र रूप से चलाने का अधिकार दिया है और छात्र इसका लाभ उठा सकते हैं। ऐसे में मदरसों में NCPCR जैसी संस्थाओं का हस्तक्षेप एक गैरकानूनी और असंवैधानिक कृत्य है । बच्चों की वास्तविक समस्याओं को नजरअंदाज कर यह संस्था अनावश्यक रूप से ऐसे मामले में हस्तक्षेप कर रही है जो इसके दायरे से बाहर है। 

जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने उत्तर प्रदेश सरकार से इस मुद्दे पर जारी अपने शिक्षा विरोधी सर्कुलर को वापस लेने की भी मांग की, जिसके तहत जिला अधिकारियों को गैर-अनुमोदित मदरसों (सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में ऐसे 8449 मदरसे हैं) के छात्रों को सरकारी स्कूलों में स्थानांतरित का निर्देश दिया गया है। जमाअत-ए-इस्लामी ने कहा कि देश में, जहां लाखों लोग रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं जैसी बुनियादी जरूरतों से वंचित हैं, मदरसा लाखों बच्चों को मुफ्त भोजन और आवास के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करता है। और अपनी प्रभावी और स्थिर शिक्षा प्रणाली के माध्यम से, इसने कई पीढ़ियों से महत्वपूर्ण लोगों को तैयार किया है जिन्होंने देश और मानवता की सेवा की है, जिनमें स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेता भी शामिल हैं। इस पृष्ठभूमि में, राज्य सरकार का यह आदेश न केवल मदरसों की स्थिर ऐतिहासिक व्यवस्था को प्रभावित करने का एक शर्मनाक प्रयास है, बल्कि लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों के अधिकारों पर एक असंवैधानिक हस्तक्षेप भी है। संगठन ने देश के सभी न्यायप्रिय नागरिकों से अपील भी की कि वे इस एकतरफा क्रूर कार्रवाई के खिलाफ आवाज उठाएं और इसे रोकें।

 

Asmita Sarkar

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