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IIT मद्रास को मिला आज तक का सबसे बड़ा दान, पूर्व छात्र ने दिए 228 करोड़

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मद्रास (IIT Madras) को 228 करोड़ रुपये का अपना अब तक का सबसे बड़ा सिंगल दान प्राप्त हुआ है। संस्थान को यह डोनेशन अपने पूर्व छात्र डॉ. कृष्णा चिवुकुला से प्राप्त हुआ है। डॉ. कृष्णा चिवुकुला इंडो-एमआईएम के संस्थापक और सीईओ हैं। यह दान भारत में किसी भी शैक्षणिक संस्थान को दिए गए अब तक के सबसे बड़े दानों में से एक है। 

डॉ. कृष्णा ने 1970 में आईआईटी मद्रास से एमटेक किया था। फिर 1980 में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से एमबीए किया। न्यूयॉर्क में हॉफमैन ग्रुप ऑफ कंपनीज में समूह अध्यक्ष और सीईओ के रूप में कार्य करने के बाद, डॉ. चिवुकुला ने लगातार दो “विश्व की नंबर एक” कंपनियों की स्थापना की। उन्होंने शिवा टेक्नोलॉजीज इंक और इंडो एमआईएम प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की स्थापना की। 1997 में, डॉ. कृष्णा चिवुकुला भारत में ‘मेटल इंजेक्शन मोल्डिंग (एमआईएम)’ नामक एक अत्याधुनिक इंजीनियरिंग विनिर्माण तकनीक लेकर आए थे, जबकि यह अभी भी अमेरिका में एक उभरती हुई तकनीक थी। वर्तमान में उनकी कंपनी क्षमता और बिक्री के मामले में एमआईएम तकनीक में दुनिया में नंबर एक स्थान पर है। 

आईआईटी मद्रास ने एक विज्ञप्ति में कहा कि संस्थान ने उनके नाम पर एक शैक्षणिक ब्लॉक का नाम ‘कृष्ण चिवुकुला ब्लॉक’ रखा है। संस्थान को दान में मिली इस रकम का इस्तेमाल कई उद्देश्यों को पूरा करने के लिए किया जाएगा, जिसमें विदेशी छात्रों को स्कॉलरशिप के जरिये समर्थन, रिसर्च एक्सीलेंस ग्रांट, अंडरग्रेजुएट फेलोशिप प्रोग्राम, स्पोर्ट्स स्कॉलरशिप प्रोग्राम और शास्त्र मैगजीन का विकास शामिल है। इसके अलावा कृष्णा चिवुकुला ब्लॉक के रखरखाव और अन्य एक्टिविटी के लिए रकम का इस्तेमाल किया जाएगा।

संस्थान ने कैंपस में एक कार्यक्रम के दौरान डॉ. कृष्णा चिवुकुला के सम्मान में एक शैक्षणिक ब्लॉक ‘कृष्णा चिवुकुला ब्लॉक’ का नामकरण किया। इस कार्यक्रम में डॉ. कृष्णा चिवुकुला, आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटी, आईआईटी मद्रास के डीन (पूर्व छात्र और कॉर्पोरेट संबंध) प्रोफेसर महेश पंचाग्नुला, आईआईटी मद्रास के सीईओ, संस्थागत उन्नति कार्यालय के सीईओ कवीराज नायर और अन्य संकाय, शोधकर्ता, कर्मचारी और छात्र शामिल हुए। 

इंडो-एमआईएम के संस्थापक और सीईओ डॉ. कृष्णा चिवुकुला ने इस मौके पर कहा, “आईआईटी मद्रास में मेरी शिक्षा न केवल अत्यधिक यादगार और सुखद रही, बल्कि इसने मुझे जीवन में बहुत कुछ हासिल करने में सक्षम बनाया और मुझे एक ऐसी स्थिति में रखा जहां मैं संस्थान को एक गिफ्ट दे सकता हूं – भारत में किसी विश्वविद्यालय को अब तक का सबसे बड़ा एकल दान!”

वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान आईआईटी मद्रास ने रिकॉर्ड 513 करोड़ रुपये जुटाए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 135% ज्यादा है। यह धनराशि पूर्व छात्रों, सीएसआर फंडों और कॉर्पोरेट फर्मों से अनुदान के माध्यम से जुटाई गई थी। संस्थान को 1 करोड़ रुपये से अधिक देने वाले दानदाताओं की संख्या 48 है (16 पूर्व छात्र दानकर्ता और 32 कॉर्पोरेट भागीदार)। अकेले पूर्व छात्रों के माध्यम से 2023-24 के दौरान जुटाई गई कुल राशि 367 करोड़ रुपये थी, जो पिछले वर्ष की तुलना में 282% की वृद्धि है। 

इस आउटरीच को पॉसिबल बनाया है, इंस्टिट्यूशन ऐडवांसमेंट ने, जो आईआईटी मद्रास पूर्व छात्र चैरिटेबल ट्रस्ट की एक पहल है। आईआईटी मद्रास के इंस्टिट्यूट ऐडवांसमेंट के सीईओ कविराज नायर ने बताया कि ‘उनका (डॉ. कृष्णा) योगदान शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए उनके समर्पण का प्रमाण है। यह न केवल हमारे संस्थान को ऊपर उठाता है बल्कि यह एक उदाहरण के रूप में भी कार्य करता है कि कैसे हमारे पूर्व छात्र समुदाय सार्थक परिवर्तन को आगे बढ़ाते रहते हैं।’

 

 

Asmita Sarkar

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