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पेपर लीक मामले में हाईकोर्ट के पूर्व रजिस्ट्रार और उनकी महिला मित्र को पांच साल की जेल

हरियाणा सिविल सेवा (न्यायिक शाखा) परीक्षा पेपर लीक मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व रजिस्ट्रार (भर्ती) बलविंदर कुमार शर्मा और उनकी महिला मित्र सुनीता को दोषी करार देते हुए पांच-पांच साल की सजा सुनाई है। अदालत ने शर्मा पर 1.5 लाख रुपये और सुनीता पर 60 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। शर्मा इस अवधि के दौरान हाई कोर्ट में तैनात थे। उनके अलावा सुशीला नाम की महिला को भी अदालत ने दोषी करार दिया है। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में विश्वास बहाल करने के लिए व पेपर लीक के मुद्दे से निपटने के लिए विशिष्ट कड़े कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन करना होगा।

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंजू बजाज चांदना ने कहा कि पेपर लीक के दूरगामी परिणाम होते हैं और अभ्यर्थियों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इससे विद्यार्थियों में अशांति, तनाव और चिंता का का माहौल पैदा होता है। साथ ही, अकादमिक रूप से बेहतर प्रदर्शन करने की उनकी प्रेरणा प्रभावित होती है। अदालत ने कहा कि जिस देश में बेरोजगारी एक निरंतर चिंता का विषय बनी हुई है, वहां पेपर लीक का खतरा बढ़ गया है और भर्तियों में देरी से सरकारी विभागों और प्रशासनिक एजेंसियों की कार्यकुशलता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जो पहले से ही कम मानव संसाधनों की समस्या से जूझ रहे हैं।  

न्यायाधीश ने कहा कि इन दिनों अपराध संगठित रैकेट के माध्यम से किए जा रहे हैं, जिसमें शिक्षा क्षेत्र के खिलाड़ी, प्रश्नपत्र तैयार करने वाले लोग, कोचिंग सेंटर, सलाहकार, किराए की एजेंसियां और प्रिंटिंग प्रेस शामिल हैं।

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंजू बजाज चांदना ने कहा कि बलविंदर कुमार शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला बनता है क्योंकि उनके पास प्रारंभिक परीक्षा- 2017 का अंतिम प्रश्न पत्र थे और इसकी पवित्रता और अखंडता बनाए रखने का दायित्व उस पर था। हालांकि, बलविंदर कुमार शर्मा ने अपनी करीबी दोस्त सुनीता को प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया जिसे इसका लाभ मिला और उच्चतम अंक प्राप्त किए। इस प्रकार बलविंदर ने पद का दुरूपयोग किया।

अदालत ने आरोपितों को आपराधिक साजिश रचने, भ्रष्टाचार समेत अन्य धाराओं के तहत दोषी करार दिया। मामले में दोषी करार दी गई सुशीला एफआईआर होने के बाद नौ माह तक जेल में रही थी, इसलिए उसकी सजा अंडरगॉन कर दी, यानी उसे और सजा नहीं सुनाई गई। इस मामले में चंडीगढ़ कांग्रेस के नेता सुनील चोपड़ा सहित छह और आरोपित थे, लेकिन उन्हें सुबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।

इस मामले में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद सितंबर 2017 में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। बाद में फरवरी 2021 में सर्वोच्च न्यायालय ने मामले को दिल्ली स्थानांतरित कर दिया था। आरोप के मुताबिक पिंजौर की एक महिला वकील ने हाई कोर्ट में शिकायत दी थी कि एचसीएस ज्यूडिशियल के लिए हुई भर्ती परीक्षा का पेपर लीक हुआ था। महिला वकील ने कहा कि पेपर डेढ़-डेढ़ लाख रुपये में बिक रहा था। उसे ये बात सुनीता ने बताई थी और बाद में उसी ने परीक्षा में टॉप किया था।

 

Asmita Sarkar

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