
देश भर में आए दिन किसी न किसी छात्र की आत्महत्या अखबारों की सुर्खियां बटोरती है। अब देश में छात्रों की आत्महत्या को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। नई रिपोर्ट में सामने आया है कि भारत में छात्रों की आत्महत्या की दर चिंताजनक दर से बढ़ रही है और यह जनसंख्या वृद्धि की दर से भी ज्यादा हो गई है।
यही नहीं, छात्रों की आत्महत्या दर कुल आत्महत्या की दर से भी ज्यादा हो गई है। भारत में समग्र आत्महत्या दर में सालाना 2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि छात्रों की आत्महत्या दर 4 प्रतिशत बढ़ गई है। यानी छात्रों की आत्महत्या दर राष्ट्रीय औसत से दोगुनी है। कुल आत्महत्याओं में छात्रों की आत्महत्या का प्रतिशत 7.6 है, जो वेतनभोगी व्यक्तियों, किसानों, बेरोजगार व्यक्तियों और स्वरोजगार वाले व्यक्तियों जैसे कई अन्य व्यवसायों के समान है। IC-3 सम्मेलन में जारी ‘छात्र आत्महत्या: भारत में फैलती महामारी’ रिपोर्ट में ये आंकड़े सामने आए हैं।
यूं तो राजस्थान का कोटा शहर छात्रों की आत्महत्या को लेकर काफी बदनाम है लेकिन गैर लाभकारी संस्था आईसी3 की रिपोर्ट के आंकड़े कुछ और ही बयां कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान नहीं बल्कि महाराष्ट्र से विद्यार्थियों की आत्महत्या की खबरें सबसे ज्यादा आ रही हैं। यानी छात्रों की सुसाइड के मामले में महाराष्ट्र पहले पायदान पर है।
रिपोर्ट बताती है कि साल 2021 और 2022 के बीच छात्रों की आत्महत्याएं 4.2 प्रतिशत के दर से बढ़ी है, जबकि कुल आत्महत्याओं के मामलों में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। राजस्थान 571 छात्रों की आत्महत्या के मामले के साथ 10वें स्थान पर है जबकि महाराष्ट्र 1764 मामलों के साथ पहले नंबर पर है। साल 2022 में देश में छात्रों की आत्महत्या के 13,089 मामले दर्ज हुए थे जिनमें बाद में भी बढ़ोतरी हुई है।
नेशनस क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक, आज से 24 साल पहले यानी साल 2000 में छात्र आत्महत्या के 5,352 केस दर्ज हुए थे जो 2022 आते-आते 13,089 हो गए हैं। आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र, तमिलनाडू और मध्य प्रदेश लगातार छात्र आत्महत्याओं के मामले में सबसे ऊपर बने हुए हैं। 2022 में, छात्र आत्महत्या के कुल मामलों में 53 प्रतिशत पुरुष छात्र थे। पुरुष छात्रों की आत्महत्या की संख्या महिला छात्रों से अधिक है। हालांकि, पिछले 10 वर्षों में पुरुष छात्रों की आत्महत्या में 50 प्रतिशत, जबकि महिला छात्रों की आत्महत्या में 61 प्रतिशत वृद्धि हुई है।




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