
दिल्ली उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि सेंट स्टीफंस कॉलेज में सात छात्रों के प्रवेश पर कोई असर नहीं पड़ेगा, जिन्हें पिछले सप्ताह न्यायालय ने दाखिला लेने की अनुमति दी थी।
हालांकि, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) से कहा कि वह मौजूदा शैक्षणिक सत्र के लिए सेंट स्टीफंस में कोई और सीट आवंटित न करे।
पीठ ने कहा, “न्यायालय का दरवाजा खटखटाने वाले सात छात्रों को अगले आदेश तक कक्षाओं में भाग लेने की अनुमति है। हालांकि, यह निर्देश दिया जाता है कि विश्वविद्यालय कोई और आवंटन नहीं करेगा।”
यह मामला डीयू और कॉलेज के बीच नीतिगत विवाद से उपजा है। सेंट स्टीफंस ने कुल 22 छात्रों के प्रवेश को विश्वविद्यालय द्वारा “अतिरिक्त आवंटन” करार देते हुए रोक दिया था। प्रभावित छात्रों में से सात ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। 23 अगस्त को हाई कोर्ट की सिंगल जज बेंच ने छात्रों को प्रोविजनल एडमिशन दिया था। कॉलेज ने इस आदेश के खिलाफ अपील दायर की, जिसके बाद छात्रों को कक्षाओं में आने से रोक दिया गया। मामले की सुनवाई फिर से कोर्ट की सिंगल बेंच ने की, जिसने 6 सितंबर को सेंट स्टीफंस को सात छात्रों को एडमिशन देने को कहा। सोमवार को कॉलेज ने सिंगल जज बेंच के खिलाफ अपील दायर की।
दो जजों की बेंच ने 6 सितंबर के आदेश को चुनौती देने वाली सेंट स्टीफंस की अपील पर भी नोटिस जारी किया और यूनिवर्सिटी से जवाब मांगा। कोर्ट ने उन्हें चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा और मामले की अगली सुनवाई अगले साल 28 जनवरी को तय की।




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