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वैदिक गणित पर ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय में दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित 

ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय, कोरापुट के सुनाबेडा परिसर में 16 और 17 सितंबर को वैदिक गणित पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित किया गया।  गणित विभाग द्वारा आयोजित कार्यशाला में समकालीन शिक्षा और दैनिक जीवन में वैदिक ज्ञान के महत्व पर प्रकाश डाला गया।

विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रोफेसर चक्रधर त्रिपाठी, ने कार्यशाला का उद्घाटन किया और आधुनिक जीवन में वेदों की प्रासंगिकता पर जोर दिया। उन्होंने इस बारे में बात की कि कैसे भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पौराणिक कथाएं और प्राचीन ग्रंथ वैज्ञानिक सिद्धांतों में निहित हैं जो आज भी बहुत प्रासंगिक हैं। प्रोफेसर त्रिपाठी ने हनुमान चालीसा के एक श्लोक से प्राप्त गणितीय अवधारणा को वैदिक ज्ञान के व्यापक विषय से जोड़ा।

विश्वविद्यालय के सलाहकार प्रोफेसर वीसी झा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप वैदिक ज्ञान को शिक्षा प्रणाली में शामिल करने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने टिप्पणी की कि वेद केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं हैं, बल्कि ब्रह्मांड के लिए मार्गदर्शक सिद्धांतों के रूप में भी कार्य करते हैं।

स्कूल ऑफ लैंग्वेज एंड लिटरेचर के डीन और रजिस्ट्रार (प्रभारी) प्रोफेसर नृसिंह चरण पंडा ने ‘ओम’ शब्द के महत्व और मानव मन पर इसके गहरे प्रभाव पर प्रकाश डाला। अनंत की अवधारणा को संदर्भित करने के लिए एक संस्कृत शब्द का हवाला देते हुए, उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मंदिर वास्तुकला की कला की जड़ें वैदिक गणित में हैं।

कार्यशाला में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मुकुट मणि त्रिपाठी, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ बेसिक साइंस के प्रोफेसर अवनीश कुमार और प्रोफेसर मुकुट मणि त्रिपाठी के इंस्टीट्यूट ऑफ इनविटेड लेक्चर्स की एक श्रृंखला शामिल थी। श्री ओड़मापाद सिंघानिया शिक्षा केंद्र के डॉ. राकेश भाटिया ने भी सत्र में भाग लिया। भारत के गौरवशाली वैज्ञानिक अतीत की कहानियों ने आर्यभट्ट, भास्कर, ब्रह्मगुप्त, रामानुजन, एसएन बोस और होमी जे भाभा जैसे महान भारतीय गणितज्ञों और वैज्ञानिकों के योगदान को उजागर करके छात्रों को प्रेरित किया।

इस अवसर पर ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय के गणित विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार साहू भी उपस्थित थे। विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. फगुनाथ भोई ने बताया कि कार्यशाला का संचालन डॉ. सर्वेश्वर बारिक ने किया, जबकि शुभम पाढ़ी ने संयुक्त संयोजक के रूप में कार्य किया ।

 

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