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कॉलेज परिसर में सिगरेट-तंबाकू पर प्रतिबंध, सख्ती से लागू करनी होगी यूजीसी की गाइडलाइंस

शिक्षण संस्थानों के परिसर में सिगरेट और तंबाकू को लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी (UGC) ने सख्ती दिखाई है। यूजीसी ने देश भर के सभी शिक्षा संस्थानों को सख्त हिदायत देते हुए कहा है कि टोबैको फ्री कैंपस के लिए लागू गाइडलाइंस का शत प्रतिशत पालन होना चाहिए। कैंपस में तंबाकू का किसी भी रूप में इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। कैंपस के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर लगी रोक को सुनिश्चित करने के लिए भी कड़े कदम उठाए जाने चाहिए। यूजीसी ने सभी यूनिवर्सिटीज के वाइस चांसलर और कॉलेजों के प्रिंसिपल्स को लिखा है कि युवाओं में तंबाकू की लत बड़ी चिंता का विषय है। शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वह इस समस्या को दूर करने की दिशा में तय किए गए हर नियम को सख्ती से लागू करें। छात्रों के बीच ई-सिगरेट के बढ़ते प्रचलन पर भी यूजीसी ने चिंता जताई है।

यूजीसी ने ग्लोबल यूथ टोबैको सर्वे (GYTS) 2019 का उदाहरण देते हुए कहा है कि 13 से 15 वर्ष की आयु के 8.5% स्टूडेंट्स अलग-अलग तरीकों से तंबाकू प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं। 5500 से ज्यादा बच्चों को हर साल तंबाकू की लत लगती है। सर्वे में सामने आया था कि भारत में करीब 14% स्टूडेट्स (13-15 वर्ष) तंबाकू के आदी हो गए थे। इसके बाद से शिक्षा संस्थानों में मुहिम चली और कुछ असर भी देखने को मिला। लेकिन स्टूडेंट्स द्वारा तंबाकू यूज करना अभी भी चिंता का विषय है।

इस सर्वे में दावा किया गया कि 20 साल से कम उम्र में तंबाकू सेवन की शुरुआत करने वाले ज्यादातर लोग ताउम्र इसके आदी हो जाते हैं। तंबाकू और ई-सिगरेट के इस्तेमाल से स्टूडेंट्स की फास्ट लर्निग की क्षमता प्रभावित होती है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने टबैको फ्री कैंपस के लिए गाइडलाइंस बनाई थी। इसे हर संस्थान को भेजा गया है। टोबैको फ्री कैंपस में वे संस्थान आते हैं जिनके कैंपस के भीतर और बाहरी क्षेत्र (100 गज तक) में टोबैको प्रोडक्ट्स के इस्तमाल पर रोक होती है। संस्थानों ने इसके लिए व्यापक नीतियां बनाई हैं। यूनिवर्सिटीज व कॉलेजों में टोबैको फ्री एरिया का बोर्ड लगाना जरूरी है। इन संस्थानों को नियमित रूप से टोबैको नियंत्रण कार्यक्रम का आयोजन करना होता है। स्वास्थ्य मंत्रालय भी समय-समय पर राज्यों को ई-सिगरेट पर बैन को प्रभावी ढंग से लागू करने के बारे में लिखता रहता है। देश में ई-सिगरेट पर बैन 2019 से लागू है।

यूजीसी के संज्ञान में आया है कि ऑनलाइन स्टोर्स व लोकल वेंडर्स के जरिए ई सिगरेट मिल जाती है। स्टेशनरी स्टोर्स की मिलीभगत से भी छात्रों को ई-सिगरेट मिल जाती है। ऐसे में यूनिवर्सिटी प्रशासन जब तक सख्त कदम नहीं उठाएगा, तब तक छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होता रहेगा।

Asmita Sarkar

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