
ऑल इंडिया ओबीसी स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AIOBCSA) ने आईआईएम लखनऊ (IIML) पर आरक्षण नीति और रोस्टर का पालन नहीं करने का आरोप लगाया है। संगठन ने इस सम्बन्ध में आरटीआई दाखिल किया था। आरटीआई का जवाब मिलने पर संगठन ने आईआईएम लखनऊ पर यह आरोप लगाया है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, आईआईएम लखनऊ में अनुसूचित जनजाति (ST) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) श्रेणियों के तहत कोई भी पद नहीं भरा गया है।
ऑल इंडिया ओबीसी स्टूडेंट्स एसोसिएशन का कहना है कि यह “पूरी तरह से अस्वीकार्य” है कि संस्थान ने आरक्षण प्रणाली को लागू नहीं किया है। AIOBCSA ने एक्स (पूर्व में द्विटर) पर एक पोस्ट में कहा, “आरक्षण किस उद्देश्य के लिए है? संवैधानिक आदेश नहीं? पूरी तरह से अस्वीकार्य है। आईआईएम लखनऊ रोस्टर और आरक्षण नीति का पालन नहीं कर रहा है।”
आंकड़ों से पता चला है कि आईआईएम लखनऊ में अब तक सामान्य वर्ग के 85.43%, ओबीसी के 2.9% और एससी के 2% पद भरे जा चुके हैं। हालांकि, एसटी और ईडब्ल्यूएस श्रेणियों में 0% सीटें भरी गई हैं। रिक्त पदों की संख्या सामान्य 6, अन्य पिछड़ा वर्ग 1, अनुसूचित जाति 1 और अनुसूचित जनजाति वर्ग की रिक्तियों की संख्या 2 है।
आरटीआई के अनुसार, देश भर में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) और आईआईएम को आवंटित प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और सहायक प्रोफेसर के लिए संकाय पदों की कुल संख्या 153 है। इसमें से 88 सामान्य वर्ग से, तीन अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से, दो अनुसूचित जाति (एससी) से विभिन्न पदों के लिए भर्ती की गई है।




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