
दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध अरबिंदो कॉलेज में हिन्दी दिवस के समापन अवसर पर “सोशल मीडिया का सबसे बड़ा बाजार है हिन्दी” विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में हिन्दी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. हंसराज सुमन ने मुख्य वक्ता के रूप में छात्रों को संबोधित किया। मंच संचालन सुनील कुमार राजस्थानी ने किया। इस अवसर पर हिंदी विषय का अध्ययन करने वाले खुशी यादव, प्रिया निगम, रोहित मंडल, हेमंत कुमार, शिवम शर्मा व सुनील कुमार समेत छात्रों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
अपने सम्बोधन में मुख्य वक्ता डॉ. हंसराज सुमन ने कहा कि सोशल मीडिया नव-जनसंचार माध्यम के रूप में हमारी जीवन शैली को बदल रहा है। इंटरनेट के द्वारा समाज के हरेक व्यक्ति तक इसकी पहुँच हो गई है। फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, लिंक्डइन, विकिपीडिया, ब्लॉग, यूट्यूब, स्नैपचैट, हैशटैग आदि अनेक वेबसाइट हैं जिसके द्वारा जनसंचार की यात्रा आगे बढ़ रही है। हिन्दी भाषी समाज सोशल मीडिया का सबसे बड़ा उपभोक्ता है।
सोशल मीडिया के नवीनतम प्रोग्राम को सबसे अधिक हिन्दी भाषा में ही प्रयोग किया जाता है। हिन्दी भाषी क्षेत्र व्यवसाय से लेकर शिक्षा के क्षेत्र तक तथा आपसी व्यवहार से लेकर प्रचार तक सोशल मीडिया के माध्यम से जुड़ रहा है। चुनाव प्रचार, राजनीतिक गतिविधि, जनता को प्रभावित करने की कोशिश और वोटिंग तक सोशल मीडिया के माध्यम से की जा रही है। इसलिए वर्तमान समय में सोशल मीडिया का सबसे बड़ा बाज़ार हिन्दी भाषी समाज है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर हिन्दी भाषा वैश्विक भाषा के रूप में अपना स्थान बना चुकी है।
डॉ. हंसराज सुमन ने आगे बताया कि आज हिन्दी ने विश्व में सबसे अधिक बोली, पढ़ी-लिखी और समझी जाने वाली भाषा होने का गौरव प्राप्त कर लिया है। हिन्दी भाषा की इस प्रगति के लिए सोशल मीडिया की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता है। डॉ सुमन ने कहा कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया एक ऐसा नवविकसित जनसंचार माध्यम है जिसके द्वारा अपने भावों और विचारों को विश्व के किसी भी कोने में संप्रेषित करना संभव हो गया है।
डॉ. हंसराज सुमन ने छात्रों को यह जानकारी दी कि हिन्दी भाषा ने देश की विभिन्न संस्कृतियों और भाषाओं को एकता के सूत्र में बाँधने का कार्य किया है। आज देश की 44% से अधिक आबादी हिन्दी भाषा का प्रयोग कर रही है। इसमें सोशल मीडिया का प्रयोग हरेक पढ़ा-लिखा व्यक्ति कर रहा है अर्थात् हिन्दी क्षेत्र का वह व्यक्ति जिसके हाथ में मोबाइल है वह संपर्क और संदेश के लिए हिन्दी भाषा का प्रयोग कर रहा है।
डॉ.सुमन ने छात्रों को बताया कि देश में कोरोना काल में सोशल मीडिया ने जो भूमिका निभाई, वह महत्वपूर्ण थी। व्हाट्सएप, फेसबुक, और अन्य माध्यमों ने इस भाषा को घर-घर पहुंचाने का काम किया था। अब तो नेटवर्क पर कई ऐसी एप्लिकेशन भी विकसित हो चुकी हैं जो हिन्दी भाषा को सरल और सुगम बनाती हैं। अब सोशल नेटवर्किंग के माध्यम से हिन्दी भाषा सीखने का कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है। आज हिन्दी भाषा ने न केवल भारत को एक सूत्र में पिरोया है बल्कि वह हमारे सांस्कृतिक मूल्यों और एकता के प्रतीक की महत्वपूर्ण भूमिका भी निभा रही है।




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