
जेएसएससी सीजीएल परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर बड़ी तादाद में छात्रों ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। अभ्यर्थियों के प्रदर्शन को देखते हुए जेएसएससी कार्यालय के पास भारी संख्या में पुलिस की तैनाती की गई थी।
राज्य के विभिन्न हिस्सों से एकत्र हुए छात्रों ने झारखंड सामान्य स्नातक स्तरीय संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा (JGGLCCE) में ‘गलत व्यवहार’ का आरोप लगाया। छात्रों ने कहा कि आयोग के द्वारा एक बार फिर सीजीएल परीक्षा की सीट बेचने का काम किया जा रहा है। जिस तरह से 21 और 22 सितंबर को परीक्षा के दौरान प्रश्न पत्र लीक हुए और इसका साक्ष्य भी छात्रों ने दिया, बावजूद इसके आनन-फानन में उत्तर कुंजी जारी किए गए, उससे साफ जाहिर होता है कि जेएसएससी की मंशा क्या है।
गौरतलब है कि झारखंड सामान्य स्नातक स्तरीय संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा 21 और 22 सितंबर को 823 केंद्रों पर आयोजित की गई थी। किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए दोनों दिन परीक्षा के दौरान मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गई थीं। झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार द्वारा छात्रों की शिकायतों की जांच के लिए आयोग को लिखे गए पत्र के मद्देनजर भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों की जांच के लिए जेएसएससी ने पिछले सप्ताह तीन सदस्यीय समिति गठित की थी।
एक आंदोलनकारी छात्र ने बताया कि हजारीबाग और रामगढ़ से सैकड़ों छात्र रांची के जेएसएससी कार्यालय तक करीब 100 किलोमीटर पैदल मार्च कर पहुंचे। उन्होंने कहा, “हमें सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा। यह सरकार एक भी परीक्षा स्वतंत्र और निष्पक्ष आयोजित नहीं कर पाई।”
छात्र नेता मनोज यादव ने दावा किया कि उन्होंने परीक्षा के दौरान गड़बड़ी के सबूत तीन प्रारूपों- लिखित, पेन-ड्राइव और सीडी में पेश किए थे, लेकिन अब जेएसएससी के अधिकारी कह रहे हैं कि सीडी खाली थी और उसमें कोई सामग्री नहीं थी।
छात्रों के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए रांची जिला प्रशासन ने 26 सितंबर से ही आयोग कार्यालय के 100 मीटर के दायरे में बीएनएसएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर राखी है। यह आदेश 2 अक्तूबर की रात 10 बजे तक प्रभावी रहेगा। निषेधाज्ञा के बावजूद सोमवार 30 सितंबर को बड़ी संख्या में छात्र कार्यालय पहुंचे।
इस दौरान एक छात्र नेता ने कहा कि 2015-16 से यह परीक्षा ली जा रही है। इसके बावजूद अब तक पूरा नहीं हुआ है। एक बड़ा रैकेट जिसमें कुछ कोचिंग संस्थान भी हैं जो इसमें संलिप्त होकर सेटिंग कर मेधावी छात्रों का गला घोटने का काम करते हैं। छात्रों की मांग है कि जिस तरह से इस बार भी परीक्षा के दौरान गड़बड़ियां सामने आई हैं, उसे देखते हुए इस परीक्षा को रद्द किया जाए।




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