
पोस्टग्रेजुएट मेडिकल कोर्सेज में एडमिशन की राह देख रहे छात्रों का इंतजार लंबा होने वाला है। तमिलनाडु सहित करीब छह राज्यों ने नीट पीजी काउंसलिंग पर रोक लगा दी है। तमिलनाडु के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने काउंसलिंग के लिए नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशनल इन मेडिकल साइंसेज (एनबीईएमएस) से छात्रों के मार्क्स की मांग की है। साथ ही छात्रों के अंकों में इन्सेंटिव मार्क्स जोड़ने पर पेच फंस गया है।
दरअसल, एनबीईएमएस ने नीट पीजी के व्यक्तिगत स्कोरकार्ड जारी नहीं किया था। नीट पीजी एग्जाम 11 अगस्त को दो शिफ्ट में हुआ था और परिणाम 23 अगस्त को घोषित किए थे। एनबीईएमएस ने परीक्षार्थियों के अंकों को नॉर्मलाइज्ड कर उनके प्रतिशत और रैंक की घोषण की थी। रिपोर्ट के मुताबिक तमिलनाडु के मेडिकल एजुकेशन डायरेक्टर डॉ. जे. संगुमनी ने एनबीई को पत्र लिख परीक्षार्थियों के व्यक्तिगत अंकों की मांग की है क्योंकि अंकों के बिना काउंसलिंग आयोजित करना मुश्किल हो रहा है, खासतौर पर इन-सर्विस अभ्यर्थियों के लिए।
एनएमसी के अनुसार पोस्टग्रेजुएट मेडिकल कोर्सेज में दाखिले के लिए गाइडलाइंस पहले ही जारी कर दी गई थी। पीजी मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशन्स-2023 राज्यों को सेवारत उम्मीदवारों के लिए इंसेटिव मार्क्स देने की अनुमति नहीं देता है। हालांकि अधिकारियों ने मार्क्स कैलकुलेट करने के लिए प्रतिशत स्कोर को रिवर्स कैलकुलेट करने की कोशिश की लेकिन वे विश्वसनीय नहीं था। रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ. संगुमनी ने कहा, हमें छात्रों के व्यक्तिगत मार्क्स चाहिए वरना हम इन्सेंटिव मार्क्स नहीं जोड़ सकते। हमें नॉर्मलाइज्ड मार्क्स की जरूरत है।
दूसरी ओर केंद्र में डीजीएचएस के तहत मेडिकल काउंसिल कमेटी (एनएमसी) ने नीट पीजी राउंड-1 काउंसलिंग के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू कर दी है, लेकिन एडमिशन शेड्यूल और डिटेल्स वाला इंफॉर्मेशन बुलेटिन जारी नहीं किया है। कुछ उम्मीदवारों ने नीट पीजी परिणामों में पारदर्शिता की मांग कर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिकाकर्ताओं ने नीट पीजी में लागू नॉर्मलाइजेशन और परिणामों की विसंगतियों पर चिंता जाहिर की है।




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