
कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले की जांच के दौरान सीबीआई को अब मेडिकल कॉलेज की परीक्षाओं के पेपर लीक करने के लिए पैसे लेने के कुछ नए सबूत मिले हैं। सीबीआई ने पता लगाया है कि पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष अपने घर में काम करने वाले आशीष पांडेय के जरिए घूस के पैसे मंगवाते थे, इसके बदले छात्रों को परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक कराते थे।
खुलासे में सामने आया है कि जूनियर डॉक्टरों और छात्रों के एक वर्ग ने पिछले कुछ सालों में शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना, बेहिसाब पैसे की वसूली, परीक्षा में फेल करने की धमकी और यौन दुराचार को लेकर कॉलेज परिसर में अपनी जागीर बना लिया था। विशेष कॉलेज परिषद ने 59 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कर उन्हें कड़ी सजा सुनाई है। 6 छात्रों को चेतावनी देकर छोड़ा गया, जबकि बाकी सभी को छह महीने से एक साल तक के लिए परिसर से निष्कासित कर दिया गया है।
कॉलेज परिषद ने 59 आरोपियों की एक सूची बनाई है, जिसमें 36 जूनियर डॉक्टर और 23 छात्र शामिल हैं। आरोपों की गंभीरता के आधार पर उन्हें तीन समूहों में वर्गीकृत किया गया है। जूनियर डॉक्टरों और छात्रों ने बताया कि घोष के प्रिंसिपल बनने के बाद से गुट का आतंक बढ़ा है। इस मामले में आशीष पांडे और रेडियोथेरेपी विभाग के वरिष्ठ रेजिडेंट सौरव पॉल के नाम भी सामने आए हैं। पांडे सीबीआई की हिरासत में हैं, और पॉल भी जांच के दायरे में हैं। दोनों को काउंसिल द्वारा सबसे सख्त कार्रवाई के तहत कॉलेज और छात्रावास से निष्कासित किया गया है।
सीबीआई अब घोष और पांडे के बैंक खातों की गहन जांच कर रही है ताकि अवैध लेन-देन के बारे में और सुराग मिल सकें। इसके अलावा, घोष पर टेंडर प्रक्रिया में खेल करने और शवों को बेचने के आरोप भी लगे हैं। सीबीआई जांच में कई बड़े अधिकारियों के नाम भी सामने आए हैं, जो पश्चिम बंगाल मेडिकल काउंसिल के साथ घोष के संबंधों में शामिल हैं। इस मामले में कार्रवाई जारी है, और जल्द ही और खुलासे होने की संभावना है।




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