
पर्यटन उद्योग किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, विशेषकर सांस्कृतिक स्थलों के विकास के माध्यम से। जब हम भारत के परिप्रेक्ष्य में सांस्कृतिक धरोहरों, मंदिरों, महलों, और ऐतिहासिक स्थलों की बात करते हैं, तो ये न केवल देश की पहचान हैं, बल्कि रोजगार के अनेक अवसर भी पैदा करते हैं।
हाल के वर्षों में केंद्र सरकार के साथ-साथ विभिन्न राज्यों की सरकारों ने भी तीर्थस्थलों, धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान वाले केंद्र को विकसित करने की न सिर्फ इच्छा जताई है बल्कि इस ओर कदम भी उठाया है। चाहे वो उत्तर प्रदेश में 6 जिलों (सीतापुर, लखीमपुर, पीलीभीत, बरेली, शाहजहांपुर एवं फर्रुखाबाद) के 5 तीर्थस्थलों को आपस में जोड़ने हेतु 500 किलोमीटर से भी लम्बा श्री परशुराम तीर्थ सर्किट बनाने की बात हो, चाहे वृंदावन के ‘रंगजी’ मंदिर के आसपास के क्षेत्र का सौंद्रयीकरण कर उसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की पहल या फिर अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर के आसपास के क्षेत्रों का विकास।
केंद्र सरकार ने भी देश के 12 शहरों को “हृदय” योजना के अंतर्गत भारत के विरासत शहरों के तौर पर विकसित करने की घोषणा की है। अमृतसर, द्वारका, गया, कामाख्या, कांचीपुरम, केदारनाथ, मथुरा, पुरी, वाराणसी, वेल्लांकनी, अमरावती एवं अजमेर। हृदय योजना के अंतर्गत इन शहरों का सौन्दर्यीकरण किया जा रहा है ताकि इन शहरों की पुरानी विरासत को पुनर्विकसित कर पुनर्जीवित किया जा सके। इस हेतु देश में 15 धार्मिक सर्किट भी विकसित किये जा रहे हैं। जिनमें शामिल हैं, हिमालय सर्किट, नोर्थईस्ट सर्किट, कृष्ण सर्किट, बुद्धिस्ट सर्किट, कोस्टल सर्किट, डेजर्ट सर्किट, ट्राइबल सर्किट, वाइल्ड लाइफ सर्किट, रुरल सर्किट, स्पीरीचुअल सर्किट, रामायण सर्किट, हेरीटेज सर्किट, तीर्थंकर सर्किट एवं सूफी सर्किट। इसी प्रकार, पर्यटन मंत्रालय ने “प्रसाद” नामक एक विशेष योजना को प्रारम्भ किया है। भारतीय रेल ने भी कई विशेष सर्किट मार्ग पर विशेष रेलगाड़ियों को चलाने का अभियान प्रारम्भ किया है।
आखिर केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारें धार्मिक स्थलों को विकसित करने में एकाएक इतनी दिलचस्पी क्यों लेने लगीं हैं? इसका उत्तर दरअसल इस तथ्य में छुपा है कि भारत में यात्रा एवं पर्यटन उद्योग 8 करोड़ से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से रोजगार प्रदान कर रहा है एवं देश के कुल रोजगार में पर्यटन उद्योग की 15 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। भारत में प्राचीन समय से धार्मिक स्थलों की यात्रा, पर्यटन उद्योग में, एक विशेष स्थान रखती है। एक अनुमान के अनुसार, देश के पर्यटन में धार्मिक-सांस्कृतिक यात्राओं की हिस्सेदारी 60 से 70 प्रतिशत के बीच रहती है।
देश के पर्यटन उद्योग में लगभग 19 प्रतिशत की वृद्धि दर अर्जित की जा रही है जबकि वैश्विक स्तर पर पर्यटन उद्योग केवल 5 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज कर रहा है। भारत में पर्यटन उद्योग लगभग 23,400 करोड़ अमेरिकी डॉलर की आय अर्जित कर रहा है। देश में पर्यटन उद्योग में 87 प्रतिशत हिस्सा देशी पर्यटन का है जबकि शेष 13 प्रतिशत हिस्सा विदेशी पर्यटन का है। अतः भारत में रोजगार के नए अवसर निर्मित करने के उद्देश्य से केंद्र एवं राज्य सरकारें धार्मिक-सांस्कृतिक स्थलों को विकसित करने हेतु प्रयास कर रही हैं।
वैसे भी भारत जैसे देश में, जहाँ हर क्षेत्र में अद्वितीय सांस्कृतिक धरोहरें हैं, वहां पर्यटन का विकास अत्यधिक संभावनाएँ लिए हुए है। उदाहरण के लिए, ताज महल, कुतुब मीनार, और जैसलमेर किला जैसे स्थल लाखों पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। इन स्थलों के आसपास के क्षेत्रों में कई प्रकार की सेवाएं और व्यवसाय विकसित होते हैं, जैसे:
1. होटल और आवास सेवाएँ: पर्यटकों के लिए होटल, गेस्ट हाउस और होमस्टे जैसे विकल्प विकसित होते हैं। ये स्थान स्थानीय लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं।
2. स्थानीय हस्तशिल्प: सांस्कृतिक स्थलों के आस-पास हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों की दुकानें खुलती हैं, जिससे कारीगरों और व्यापारियों को लाभ होता है।
3. गाइड सेवाएँ: पर्यटन बढ़ने से स्थानीय गाइडों की मांग में वृद्धि होती है, जो पर्यटकों को स्थलों के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं।
4. खाद्य सेवाएँ: स्थानीय भोजन की मांग बढ़ने से रेस्तरां और कैफे खुलते हैं, जो स्थानीय लोगों को रोजगार देते हैं।
पर्यटन उद्योग में कई प्रकार की आर्थिक गतिविधियों का समावेश रहता है। यथा, अतिथि सत्कार, परिवहन, यात्रा इंतजाम, होटल आदि। इस क्षेत्र में व्यापारियों, शिल्पकारों, दस्तकारों, संगीतकारों, कलाकारों, होटेल, वेटर, कूली, परिवहन एवं टूर आपरेटर आदि को भी रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं।
भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के अनुसार, 2019 में लगभग 10.93 मिलियन विदेशी पर्यटक भारत आए। इससे अनुमानित 42 मिलियन लोगों को सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला। सांस्कृतिक पर्यटन का लगभग 25% हिस्सा इस आंकड़े में शामिल है। उक्त कारणों के चलते हाल ही के समय में भारत में पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार के चार मंत्रालय – पर्यटन मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय, रेलवे मंत्रालय एवं परिवहन मंत्रालय, आपस में तारतम्य बनाते हुए मिलकर कार्य कर रहे हैं। इन चारों मंत्रालयों के संयुक्त प्रयासों से देश में धार्मिक यात्राओं को आसान बना दिया गया है।
यूरोपीय देशों में भी सांस्कृतिक पर्यटन ने रोजगार के अवसरों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उदाहरण के लिए, फ्रांस में लूव्र संग्रहालय की वार्षिक विजिट संख्या लगभग 10 मिलियन है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।
सांस्कृतिक स्थलों का विकास न केवल देश की धरोहर को संरक्षित करता है, बल्कि रोजगार के अवसर भी पैदा करता है। यदि सही नीतियों और संसाधनों का उपयोग किया जाए, तो यह उद्योग और भी विकसित हो सकता है, जिससे लाखों लोगों का जीवन स्तर ऊँचा उठाने में मदद मिलेगी। इस प्रकार, पर्यटन उद्योग सांस्कृतिक स्थलों के विकास के माध्यम से न केवल आर्थिक समृद्धि बल्कि सामाजिक विकास का भी एक महत्वपूर्ण साधन बन सकता है।




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