Edinbox Hindi

अब नहीं लगेगा मदरसों पर ताला, NCPCR की सिफारिश पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक 

मदरसों को बंद करने की राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की सिफारिश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने NCPCR की सिफारिश पर कार्रवाई करने से मना कर दिया। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी किया है। चार हफ्ते बाद फिर सुनवाई होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के उस आदेश पर भी रोक लगा दी, जिसमें गैर-मान्यता वाले और सरकार के सहयोग से चलने वाले मदरसों के छात्रों को सरकारी स्कूलों में ट्रांसफर करने का निर्देश दिया गया था। दरअसल, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग यानी नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (NCPCR) ने शिक्षा के अधिकार कानून का अनुपालन नहीं करने पर सरकारी वित्त पोषित और सहायता प्राप्त मदरसों को बंद करने की सिफारिश की थी। 

कोर्ट ने आज इस सम्बन्ध में एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि  इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले से 17 लाख छात्रों पर असर पड़ेगा। छात्रों को दूसरे स्कूल में ट्रांसफर करने का निर्देश देना ठीक नहीं है। दरअसल 22 मार्च को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने UP मदरसा एक्ट को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि यह धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत का उल्लंघन है।

सुप्रीम कोर्ट में उक्त आदेश के खिलाफ याचिका जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने लगाई थी, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश को चुनौती दी गई थी। यह आदेश राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की रिपोर्ट पर आधारित था। राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) ने सभी राज्यों को लेटर लिखकर कहा था कि मदरसों को दिया जाने वाला फंड बंद कर देना चाहिए।

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने अपनी हालिया रिपोर्ट में मदरसों की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता जताई थी और सरकार द्वारा उन्हें दी जाने वाली धनराशि तब तक रोकने का आह्वान किया था जब तक वे शिक्षा का अधिकार अधिनियम का अनुपालन नहीं करते। रिपोर्ट में कहा गया था कि राइट टु एजुकेशन एक्ट 2009 का पालन नहीं करने वाले मदरसों की मान्यता रद्द हो और सभी मदरसों की जांच की जाए।

NCPCR ने सभी गैर-मुस्लिम बच्चों को मदरसों से निकालकर आरटीई अधिनियम, 2009 के अनुसार बुनियादी शिक्षा प्राप्त करने के लिए स्कूलों में भर्ती कराए जाने की सिफारिश की थी। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने कहा था कि मुस्लिम समुदाय के जो बच्चे मदरसों में पढ़ रहे हैं, चाहे वे मान्यता प्राप्त हों या गैर-मान्यता प्राप्त, उन्हें औपचारिक स्कूलों में दाखिला दिलाया जाए और आरटीई अधिनियम 2009 के अनुसार निर्धारित समय और पाठ्यक्रम की शिक्षा दी जाए। 

10 जुलाई, 2024 को केंद्र सरकार ने भी सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को NCPCR के निर्देशानुसार कार्रवाई करने के लिए लिखा था। NCPCR की रिपोर्ट के बाद 26 जून 2024 को उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव ने सभी जिला कलेक्टरों को राज्य के सभी सरकारी सहायता प्राप्त / मान्यता प्राप्त मदरसों की जांच करने और मदरसों के सभी बच्चों का स्कूलों में तत्काल ट्रांसफर करने को कहा था। इसी तरह का निर्देश त्रिपुरा सरकार ने भी 28 अगस्त, 2024 को जारी किया था।

 

Asmita Sarkar

Add comment

Recent posts

Most popular

Most discussed