
बांग्लादेश में एक बार फिर स्टूडेंट्स सड़कों पर उतर आए हैं। इस बार राष्ट्रपति शहाबुद्दीन को हटाने की मांग हो रही है। बांग्लादेश में सड़क पर फिर से वे ही स्टूडेंट्स उतरे हैं, जिन्होंने विरोध प्रदर्शन कर शेख हसीना सरकार की सरकार गिरा दी और उन्हें देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया। शेख हसीना के बाद अब बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के खिलाफ भी छात्रों में जबर्दस्त नाराजगी पैदा हो गई है। राष्ट्रपति की ओर से शेख हसीना के इस्तीफे के संबंध में दिए गए एक बयान के बाद छात्रों का गुस्सा भड़क गया और वे राष्ट्रपति को हटाने की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए।
नाराज छात्रों ने मंगलवार की रात राजधानी ढाका में राष्ट्रपति निवास बंग भवन के बाहर बड़ा प्रदर्शन किया। राष्ट्रपति भवन के बाहर जमा हुए हजारों छात्रों ने राष्ट्रपति के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।नाराज छात्रों ने पुलिस की बैरिकेडिंग हटाने का भी प्रयास किया। छात्रों को रोकने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। बाद में पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज करने के साथ ही आंसू गैस के गोले भी छोड़े। पुलिस लाठीचार्ज में पांच प्रदर्शनकारी छात्र घायल हुए हैं जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
पुलिस की ओर से राष्ट्रपति भवन के बाहर इकट्ठा हुए छात्रों को मनाने का भी प्रयास किया गया। पुलिस अफसरों ने नाराज छात्रों से बातचीत की मगर बात नहीं बन सकी। छात्रों के उग्र रवैए को देखकर सेना की ओर से भी छात्रों को मनाने का प्रयास किया गया मगर यह प्रयास भी विफल साबित हुआ। नाराज छात्रों ने राष्ट्रपति भवन जाने वाली सड़क को भी ब्लॉक कर दिया।
छात्रों के उग्र तेवर को देखते हुए पुलिस की ओर से लाठीचार्ज करने के साथ ही आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए। पुलिस लाठीचार्ज में पांच छात्रों के घायल होने की खबर है जिन्हें ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस का कहना है कि छात्रों की ओर से पथराव भी किया गया। इस दौरान ग्रेनेड फटने की जानकारी भी सामने आई है।
इससे पूर्व नाराज छात्रों ने ढाका में केंद्रीय शहीद मीनार के सामने बड़ी रैली की और राष्ट्रपति शहाबुद्दीन से इस्तीफा देने की मांग की। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति फासीवाद के सहयोगी हैं और वे नरसंहार के पक्षधर थे। उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि यदि राष्ट्रपति ने अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया तो उनके खिलाफ बड़ा अभियान चलाया जाएगा।
ढाका विश्वविद्यालय परिसर में भी छात्रों ने धरना दिया जिसमें शहाबुद्दीन के इस्तीफे की मांग की गई। नाराज छात्रों ने कहा कि संविधान को समाप्त करके देश में क्रांतिकारी सरकार का गठन किया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी आगामी लीग के लोगों को सभी प्रकार की राजनीतिक गतिविधियों से अलग करने की भी मांग की।
दरअसल ये स्टूडेंट्स अपदस्थ प्रधानमंत्री यानी शेख हसीना के इस्तीफे पर टिप्पणी करने के लिए राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन को हटाने की मांग कर रहे है। पिछले सप्ताह एक बांग्ला दैनिक को दिए गए इंटरव्यू में राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने कहा था कि उनके पास इस बात का कोई दस्तावेजी सबूत नहीं है कि अगस्त में छात्रों के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर हुए विरोध-प्रदर्शनों के बीच देश छोड़कर जाने से पहले हसीना ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। राष्ट्रपति की ओर से दिए गए इस बयान के बाद बांग्लादेश में बहस छिड़ गई है कि क्या संवैधानिक रूप से अभी भी शेख हसीना ही बांग्लादेश के प्रधानमंत्री पद पर आसीन हैं?




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