
बांग्लादेश में एक बार फिर शुरू हुए छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के बीच यहां की अंतरिम सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के छात्र संगठन बांग्लादेश छात्र लीग पर प्रतिबंध लगा दिया है। जुलाई-अगस्त में विद्रोह का नेतृत्व करने वाले एक छात्र समूह की मांग के बाद यह कदम उठाया गया। गौरतलब है कि बांग्लादेश में एक बार फिर वे स्टूडेंट्स सड़कों पर उतर आए हैं, जिन्होंने विरोध प्रदर्शन कर शेख हसीना सरकार की सरकार गिरा दी थी और उन्हें देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया था। इस बार वे राष्ट्रपति शहाबुद्दीन को हटाने की मांग कर रहे हैं। राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन की ओर से शेख हसीना के इस्तीफे के संबंध में दिए गए एक बयान के बाद छात्रों का गुस्सा भड़क गया।
बांग्लादेश के गृह मंत्रालय ने एक आधिकारिक आदेश में कहा है कि सरकार ने ‘आतंकवाद विरोधी अधिनियम 2009’ की धारा 18 की उपधारा (1) में प्रदत्त शक्तियों के तहत बांग्लादेश अवामी लीग के भ्रातृ संगठन ‘बांग्लादेश छात्र लीग’ पर प्रतिबंध लगा दिया है।
इससे पहले मंगलवार को प्रधानमंत्री शेख हसीना को हटाने के लिए नेतृत्व करने वाले समूह भेदभाव विरोधी छात्र आंदोलन ने बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के इस्तीफे सहित पांच सूत्री मांगों की घोषणा की थी। मांगों में अवामी लीग के छात्र संगठन, बांग्लादेश छात्र लीग पर प्रतिबंध लगाना भी शामिल है।
बांग्लादेश के गृह मंत्रालय की ओर से जारी एक आदेश में कहा गया है कि बांग्लादेश की आजादी के बाद से कई बार, खासकर पिछले 15 वर्षों के तानाशाही शासन के दौरान, बांग्लादेश छात्र लीग, बांग्लादेश अवामी लीग का भ्रातृ संगठन, हत्या, यातना, कॉमन रूम में उत्पीड़न, छात्रावासों में सीटों की खरीद-फरोख्त, गिरोह, बलात्कार और यौन उत्पीड़न सहित विभिन्न सार्वजनिक सुरक्षा संबंधी गतिविधियों में शामिल रहा है।
बुधवार को जारी आदेश में कहा गया है कि इनसे संबंधित दस्तावेजी जानकारी देश के सभी प्रमुख मीडिया में प्रकाशित हुई है और कुछ आतंकवादी घटनाओं में संगठन के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर आपराधिक अदालत में आरोप भी साबित हुए हैं।
आधिकारिक आदेश के अनुसार, बांग्लादेश छात्र लीग के नेताओं-कार्यकर्ताओं ने 15 जुलाई से भेदभाव विरोधी छात्र आंदोलन के दौरान बांग्लादेश छात्र लीग के नेताओं-कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शनकारी छात्रों और आम जनता पर उन्मादी और लापरवाह सशस्त्र हमले किए। सैकड़ों निर्दोष छात्रों और व्यक्तियों को मार डाला। कई और लोगों के जीवन को खतरे में डाल दिया।




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