
तमिलनाडु का पेरियार विश्वविद्यालय एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। विवाद पेरियार विश्वविद्यालय द्वारा पत्रकारिता और जनसंचार विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर आर. सुब्रमणि को कारण बताओ नोटिस जारी करने के कारण पैदा हुआ है। दरअसल, प्रोफेसर आर. सुब्रमणि को इसलिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है क्योंकि उन्होंने विश्वविद्यालय की बिना अनुमति के ‘मैकाले वाज एन एनिमी ऑफ कंजर्वेटिव एजुकेशन’ और ‘पेरियार बैटलफील्ड’ नामक पुस्तकें लिख दी हैं।
बता दें कि पिछले साल भी विश्वविद्यालय ने इसी कारण से प्रोफेसर आर. सुब्रमणि को एक ज्ञापन जारी किया था और इसके लिए उसे भारी आलोचना का सामना करना पड़ा था।
ताज़ा घटनाक्रम में 18 अक्टूबर, 2024 को जारी किए गए नोटिस में कहा गया है कि यह मानने के लिए पर्याप्त आधार हैं कि प्रोफेसर आर. सुब्रमणि ने कुलपति की अनुमति के बिना ये पुस्तकें लिखी हैं और यह कदाचार है।
नोटिस के अनुसार, यदि प्रोफेसर आर. सुब्रमणि 15 दिनों के भीतर जवाब नहीं देते हैं या उनके द्वारा प्रस्तुत जवाब को असंतोषजनक पाया जाता है, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
श्री सुब्रमणि, जो पेरियार चेयर, अन्ना चेयर और कलैगनार रिसर्च सेंटर के निदेशक (प्रभारी) होने के साथ-साथ विश्वविद्यालय के सरकारी नामित सिंडिकेट सदस्य भी हैं, ने 2007 में मैकाले नामक एक पुस्तक लिखी थी और 2023 में उन्होंने पुस्तक में 60 पृष्ठ जोड़े और इसका नाम बदलकर ‘मैकाले वाज़ एन एनिमी ऑफ़ कंज़र्वेटिव एजुकेशन’ रखा और इसे जारी किया। इसी तरह, उन्होंने 2022 में ‘पेरियार बैटलफील्ड’ नामक एक पुस्तक लिखी। 17 नवंबर, 2023 को पेरियार विश्वविद्यालय प्रशासन ने श्री सुब्रमणि को एक ज्ञापन जारी किया, जिसमें उन पर विश्वविद्यालय प्रशासन से अनुमति प्राप्त किए बिना पुस्तकों को लिखने और संपादित करने का आरोप लगाया गया।
इस मुद्दे ने उस समय एक राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया था और विभिन्न दलों ने विश्वविद्यालय की आलोचना की थी। अब एक बार फिर विश्वविद्यालय द्वारा प्रोफेसर आर. सुब्रमणि को कारण बताओ नोटिस जारी करने की वजह से विवाद पैदा हो गया है और उसकी आलोचना हो रही है।




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