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लिबासपुर गांव में नवनिर्मित स्कूल का नाम शहीद शांति स्वरूप शर्मा के नाम पर रखने की मांग

फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फॉर सोशल जस्टिस के चेयरमैन प्रोफेसर हंसराज सुमन ने दिल्ली के उप-राज्यपाल व दिल्ली की मुख्यमंत्री से बाहरी दिल्ली के बादली विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले लिबासपुर गाँव के चीन-भारत युद्ध में शहीद हुए शहीद शांति स्वरूप शर्मा की प्रतिमा लिबासपुर गाँव में स्थापित करने की मांग की है । साथ ही उन्होंने दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी को एक प्रस्ताव भी भेजा है जिसमें लिबासपुर गाँव में नवनिर्मित सीनियर सेकेंडरी स्कूल का नाम शहीद शांति स्वरूप शर्मा के नाम पर रखने की मांग की है।

 प्रोफेसर सुमन का कहना है कि यदि दिल्ली सरकार इनके नाम पर स्कूल का नाम व उनकी प्रतिमा स्थापित करती है तो उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी और भावी पीढ़ी ऐसे महान योद्धा से प्रेरणा लेंगी। उन्होंने उप-राज्यपाल व केंद्र सरकार से मांग की है कि शहीद शांति स्वरूप शर्मा के परिवार को उनके बेटे को एक शहीद के रूप में सरकार से मिलने वाली आर्थिक सहायता प्रदान की जाए ।

प्रोफेसर सुमन ने बताया है कि लिबासपुर गाँव निवासी शहीद शांति स्वरूप शर्मा माध्यमिक शिक्षा पूर्ण कर सैनिक के रूप में भर्ती हो गए। ये राजपूत रेजिमेंट में बतौर सैनिक के पद पर रहे। सन 1967 में जब चीन और भारत का युद्ध हुआ तो इनके साथियों ने चीन से लोहा लिया। चीन-भारत युद्ध में शहीद होने वाले भारतीय सैनिकों में से एक थे। बताया जाता है कि उस युद्ध में उन्होंने चीन के बहुत से सैनिकों को मार गिराया था। ये घायल अवस्था में चीनी सैनिकों को सबक सिखाते हुए अंत में 12 सितम्बर 1967 को शहीद हो गए। 

प्रोफेसर सुमन ने बताया है कि गाँव लिबासपुर में उनके परिवार के लोगों ने ओबीसी बैंक गली में उनकी प्रतिमा स्थापित की है। गाँव की युवा पीढ़ी को इस महान योद्धा के विषय में जानकारी नहीं हैं। प्रोफेसर सुमन ने बताया है कि वे इसी गाँव के मूलनिवासी हैं और जब से उनके विषय में पता चला है, वे आसपास के गाँव वालों को शहीद शांति स्वरूप शर्मा के विषय में बताते हैं कि किस प्रकार लिबासपुर गाँव के इस महान योद्धा ने चीन-भारत युद्ध में लड़ते हुए चीनी सैनिकों को मार गिराया था। उनके कई साथी मारे गए, अंत में वे चीन के सैनिकों की गोली का शिकार हुए। प्राणों की आहुति दे देश की मातृभूमि के लिए शहीद हो गए ।

प्रोफेसर सुमन ने बताया है कि लिबासपुर गाँव के लोगों का देश की आजादी में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। अलीपुर कांड व गाँव में बने पंचपीर उन शहीदों की याद दिलाता है। इसके आसपास धौलाकुंआ, अड़ाना, समयपुर, बादली आदि गांवों का इतिहास आजादी के आंदोलन में दर्ज है। इसलिए आवश्यक है कि वर्तमान पीढ़ी इस महान योद्धा के विषय में जाने। फोरम पुनः उप राज्यपाल व मुख्यमंत्री से मांग करता है कि शहीद शांति स्वरूप शर्मा की प्रतिमा लिबासपुर गाँव में स्थापित करने व सीनियर सेकेंडरी स्कूल का नाम उनके नाम पर रखा जाए। उन्होंने मुकरबा चौक से लिबासपुर गाँव तक आने वाली मुख्य सड़क का नाम शहीद शांति स्वरूप शर्मा के नाम पर रखें जाने की मांग भी दोहराई है।      

Asmita Sarkar

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