
नौवें राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बेंगलुरु के भारतीय विज्ञान संस्थान यानी आईआईएससी (IISc) में आयुष मंत्रालय द्वारा प्रायोजित मधुमेह और चयापचय यानी मेटाबोलिक विकारों के लिए आयुर्वेद उत्कृष्टता केंद्र (सीओई) की डिजिटल रूप से शुरुआत की। बता दें कि नौवें राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस की थीम ‘वैश्विक स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेद के नवाचार’ है।
आईआईएससी में सीओई का नेतृत्व डॉ. नवकांत भट और डॉ. सोना राजकुमारी कर रहे हैं। सहयोगी संस्थानों से इस सीओई के अतिरिक्त अन्वेषकों में केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान यानी सीएआरआई (CARI) की प्रमुख डॉ. सुलोचना भट, समत्वम: मानव कल्याण के लिए विज्ञान और अनुसंधान न्यास के निदेशक डॉ. एस. श्रीकांत और प्रयोग शिक्षा अनुसंधान संस्थान के डॉ. के.एस. नागभूषण शामिल हैं।
इस अवसर पर CARI ने एक बयान जारी कर कहा कि आधुनिक चिकित्सा प्रभावी उपचार प्रदान करती है, फिर भी बेहतर उपचारों और आयुर्वेद जैसे वैकल्पिक तरीकों की खोज में रुचि बढ़ रही है, और यह प्राचीन प्रणाली समग्र मधुमेह उपचार के लिए रोकथाम, जीवन शैली प्रबंधन और प्राकृतिक उपचार को प्राथमिकता देती है।
सीएआरआई ने अपने बयान में कहा कि आयुर्वेद का उत्कृष्टता केंद्र अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आयुर्वेद, मधुमेह और चिकित्सा अनुसंधान में विशेषज्ञता वाले भारत के अग्रणी संस्थानों के साथ सहयोग करेगा। ये साझेदारियां अंतःविषय अनुसंधान, ज्ञान साझा करने और शोध निष्कर्षों को वास्तविक दुनिया के नैदानिक अभ्यास में उतारने की सुविधा प्रदान करेंगी।
सीएआरआई की प्रमुख डॉ. सुलोचना भट्ट ने कहा कि सीओई के तहत नियोजित अनुसंधान में आयुर्वेदिक मधुमेह देखभाल के परिदृश्य को बदलने की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि यह केंद्र आयुर्वेदिक तरीकों की प्रभावकारिता के लिए वैज्ञानिक प्रमाण जुटाकर मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवा में इसके एकीकरण का मार्ग प्रशस्त करेगा। प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का यह तालमेल मधुमेह से पीड़ित लाखों लोगों के जीवन को बेहतर बनाएगा और एकीकृत चिकित्सा के भविष्य को आकार देगा।




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