
राजस्थान सरकार ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली उन किताबों को वापस ले लिया है, जिनमें गुजरात में 2002 में हुए गोधराकांड का जिक्र किया गया है। यानी अब राजस्थान सरकारी स्कूलों में वे किताबें नहीं पढ़ाई जाएंगी जिनमें गोधरा काण्ड का ज़िक्र है।
राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने जिला शिक्षा अधिकारियों को कक्षा 9वीं से 12वीं तक पढ़ाई जा रही ‘चिट्टी एक कुत्ता और उसका जंगल फॉर्म’ और कक्षा 11वीं, 12वीं में पढ़ाई जा रही ‘अदृश्य लोग– उम्मीद और साहस की कहानी’ और ‘जीवन की बहार’ की सभी कॉपियों को वापस मंगवाने के निर्देश दिए हैं।
हालांकि राजस्थान सरकार के शिक्षा विभाग ने इन किताबों को वापस मंगवाने के पीछे तकनीकी कारणों का हवाला दिया है और कहा है कि कागज और छपाई की गुणवत्ता का आकलन करने के लिए ‘जीएसएम जांच’ की जाएगी।
बताते चलें कि सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मन्दर द्वारा लिखी गई ‘अदृश्य लोग- उम्मीद और साहस की कहानी’ में ‘9 लंबे साल’ नामक अध्याय में गोधराकांड में ट्रेन में लगी आग को आतंकी साजिश बताया गया है। इस अध्याय में यह भी उल्लेख है कि कारसेवकों पर हमले के बाद, ‘अंडरकवर’ पुलिस अधिकारियों ने एक झुग्गी बस्ती में छापा मारा और 14 युवकों को उनके परिवारों को कोई स्पष्टीकरण दिए बिना गिरफ्तार कर लिया।
इस अध्याय में बताया गया कि ट्रेन के डिब्बों में आग लगने की दुखद घटना के बाद शाम को गुजरात के कई जिलों में मुस्लिम पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ प्रतिशोधी हिंसा भड़क उठी थी।
बहरहाल, किताबें वापस लेने के फैसले पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि “जब इन किताबों को पढ़ा गया तो पता चला कि गोधरा में जो हुआ था, उसकी नेगेटिव जानकारी दी गई है। किताबों में अपराधी को अच्छा बताया गया है, ऐसे में किताबों में गोधरा कांड के हत्यारों के महिमा मंडन का प्रयास किया गया है, जो सही नहीं है। ऐसे में विवादित किताब को वापस मंगा लिया गया है। ऐसे में अब बच्चे विवादित मुद्दों को नहीं पढ़ेंगे।”




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