
एनआईटी राउरकेला के पूर्व छात्रों ने एनआईटी परिसर में आयोजित एक बहु-जातीय सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान भारत के पहले बाजरा-आधारित प्रोबायोटिक पेय “गुटज़ी” का शुभारंभ किया।
पुरी के जगन्नाथ मंदिर के पारंपरिक “टंका तोरानी” पेय से प्रेरित गुटज़ी फॉक्सटेल बाजरा, नींबू, अदरक और मसालों जैसे प्राकृतिक अवयवों से बनाया गया है और यह तैयार गुटज़ी पारंपरिक शीतल पेय के बाजार में एक नया, स्वादिष्ट विकल्प प्रदान करता है। यह पेय लैक्टोज-मुक्त, शाकाहारी और चीनी-मुक्त है।
कंपनी के सह-संस्थापक रोहित कुमार सिंह (एनआईटी मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के 2012 के स्नातक) ने अन्य सह-संस्थापक सत्यब्रत मुनि और उत्पाद विकास का नेतृत्व करने वाले अनुराग की मौजूदगी में अपने संस्थान के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, “एनआईटी राउरकेला में गुटजी को लॉन्च करना मेरी उद्यमशीलता की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। संस्थान ने मेरे पेशेवर सोच को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी वजह से मैं नवयुवा पीढ़ी को आकर्षित कर सकने लायक एक उत्पाद पेश करने के लिए समर्थ हो सका हूं।”
एनआईटी के डीन प्रो. हिमांशु भूषण साहू (पूर्व छात्र, उद्योग और अंतर्राष्ट्रीय संबंध) ने इस अवसर पर कहा, “एनआईटी राउरकेला में, हमने लगातार नवाचार की संस्कृति को अपनाया है और उद्यमशीलता की मानसिकता को प्रोत्साहित किया है। पिछले कुछ वर्षों में, हमारे पूर्व छात्रों ने शिक्षा, उद्योग, अनुसंधान और सार्वजनिक सेवा में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। गुटज़ी हमारे ओडिशा राज्य में पनप रही उद्यमशीलता की भावना को दर्शाता है, जिसके सह-संस्थापक और निवेशक यहीं से हैं। हमें विश्वास है कि यह स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं को आकर्षित करके पेय उद्योग में प्रगति को बढ़ावा देगा। इस प्रयास में निरंतर समर्थन के लिए हमारे निदेशक, प्रो. के. उमामहेश्वर राव का भी आभार व्यक्त करता हूँ।”
गुटज़ी में एक निवेशक, श्री सिद्धार्थ मोहंती (रासायनिक इंजीनियरिंग विभाग के बैच 1999 के पूर्व छात्र) ने इस कार्यक्रम में अपना उत्साह साझा करते हुए कहा, “एनआईटी राउरकेला में गुटज़ी का शुभारंभ होते देखना मेरे लिए गर्व का क्षण है। यह पेय बाजार में एक स्वादिष्ट, स्वस्थ और मसालेदार विकल्प पेश करेगा, ऐसी उम्मीद है।”




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