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छात्र ने AI की मदद से बनाया असाइनमेंट तो यूनिवर्सिटी ने कर दिया फेल, LLM स्टूडेंट पहुंचा हाईकोर्ट

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने सोनीपत स्थित ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस यूनिवर्सिटी के ही एक स्नातकोत्तर विधि छात्र की याचिका पर दी गई है। दरअसल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की मदद से असाइनमेंट बनाने के कारण यूनिवर्सिटी ने छात्र को संबंधित विषय में फेल कर दिया। इसके बाद छात्र हाईकोर्ट पहुंच गया और अपने फेल होने के मामले को चुनौती देते हुए याचिका दायर की। इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यूनिवर्सिटी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।  

मुंबई के हैदराबाद एस्टेट निवासी कौस्तुभ शक्करवार हरियाणा के सोनीपत स्थित ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स और टेक्नोलॉजी लॉ में एलएलएम की पढ़ाई कर रहे हैं। छात्र का आरोप है कि यूनिवर्सिटी परीक्षा नियंत्रक और अनुचित साधन समिति ने उसे अपना पक्ष रखे का कोई मौका दिए बिना फेल कर दिया है। उसने यह भी कहा कि मामले के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत न करके प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन किया है। छात्र ने कहा कि यूनिवर्सिटी ने एआई-जनरेटेड सामग्री के उपयोग की पुष्टि करने वाले पर्याप्त सबूत अभी तक प्रस्तुत नहीं किए हैं।

जानकारी के अनुसार छात्र को ग्लोबलाइजेशन की दुनिया में लाॅ और न्याय सब्जेक्ट पर असाइनमेंट बनाने के लिए दिया गया था। छात्र ने एआई का इस्तेमाल कर असाइनमेंट बनाकर यूनिवर्सिटी में जमा कर दिया। छात्र का करीब 88% जवाब एआई-जनरेटेड, जिस कारण उसे फेल कर दिया गया। स्टूडेंट की याचिका पर न्यायमूर्ति जसगुरप्रीत सिंह पुरी ने सुनवाई करते हुए विश्वविद्यालय को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा है। 

छात्र ने यह भी सवाल उठाया कि क्या एग्जाम में AI के उपयोग को प्रतिबंधित करने का कोई स्पष्ट नियम है। छात्र प्रैक्टिसिंग आईपी लॉयर और एआई इंटरप्रेन्योर हैं।  स्टूडेंट का यह भी आरोप है कि परीक्षा नियंत्रक ने 4 महीने की देरी के बाद बिना सुनवाई के अपील खारिज कर दी। मामले में अगली सुनवाई 14 नंवबर को होगी। 

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने सोनीपत स्थित ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस यूनिवर्सिटी के ही एक स्नातकोत्तर विधि छात्र की याचिका पर दी गई है। दरअसल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की मदद से असाइनमेंट बनाने के कारण यूनिवर्सिटी ने छात्र को संबंधित विषय में फेल कर दिया। इसके बाद छात्र हाईकोर्ट पहुंच गया और अपने फेल होने के मामले को चुनौती देते हुए याचिका दायर की। इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यूनिवर्सिटी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।  

मुंबई के हैदराबाद एस्टेट निवासी कौस्तुभ शक्करवार हरियाणा के सोनीपत स्थित ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स और टेक्नोलॉजी लॉ में एलएलएम की पढ़ाई कर रहे हैं। छात्र का आरोप है कि यूनिवर्सिटी परीक्षा नियंत्रक और अनुचित साधन समिति ने उसे अपना पक्ष रखे का कोई मौका दिए बिना फेल कर दिया है। उसने यह भी कहा कि मामले के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत न करके प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन किया है। छात्र ने कहा कि यूनिवर्सिटी ने एआई-जनरेटेड सामग्री के उपयोग की पुष्टि करने वाले पर्याप्त सबूत अभी तक प्रस्तुत नहीं किए हैं।

जानकारी के अनुसार छात्र को ग्लोबलाइजेशन की दुनिया में लाॅ और न्याय सब्जेक्ट पर असाइनमेंट बनाने के लिए दिया गया था। छात्र ने एआई का इस्तेमाल कर असाइनमेंट बनाकर यूनिवर्सिटी में जमा कर दिया। छात्र का करीब 88% जवाब एआई-जनरेटेड, जिस कारण उसे फेल कर दिया गया। स्टूडेंट की याचिका पर न्यायमूर्ति जसगुरप्रीत सिंह पुरी ने सुनवाई करते हुए विश्वविद्यालय को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा है। 

छात्र ने यह भी सवाल उठाया कि क्या एग्जाम में AI के उपयोग को प्रतिबंधित करने का कोई स्पष्ट नियम है। छात्र प्रैक्टिसिंग आईपी लॉयर और एआई इंटरप्रेन्योर हैं।  स्टूडेंट का यह भी आरोप है कि परीक्षा नियंत्रक ने 4 महीने की देरी के बाद बिना सुनवाई के अपील खारिज कर दी। मामले में अगली सुनवाई 14 नंवबर को होगी। 

Asmita Sarkar

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