
मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु में सरकारी विधि महाविद्यालयों में शिक्षण संकायों की भर्ती की निगरानी के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति वी भारतीदासन की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित करने का आदेश दिया है। वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सदस्य पी विल्सन और सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी मैथिली के राजेंद्रन इस समिति के सदस्य होंगे। इन्हें विधि महाविद्यालयों में सहायक प्रोफेसर, सहायक प्रोफेसर (प्री-लॉ) और एसोसिएट प्रोफेसर की नियुक्ति की प्रक्रिया की निगरानी का कार्य सौंपा गया है। न्यायमूर्ति बट्टू देवानंद ने शिक्षण संकायों की नियुक्ति पर पी वसंतकुमार द्वारा 2018 में दायर याचिका पर यह आदेश पारित किया।
न्यायाधीश ने कहा कि समिति आरक्षण के नियम के सख्त क्रियान्वयन सहित चयन प्रक्रिया की निगरानी करेगी, शिक्षक भर्ती बोर्ड को निर्देश और दिशा-निर्देश जारी करेगी ताकि अधिसूचना को अंतिम रूप दिया जा सके और इसे मुकदमेबाजी से मुक्त किया जा सके और प्रश्नपत्र तैयार करने, लिखित परीक्षा आयोजित करने और यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुसार साक्षात्कार बोर्ड गठित करने के तौर-तरीके तय किए जा सकें।
याचिका को स्वीकार करते हुए न्यायाधीश ने भर्ती के लिए 2017 की अधिसूचना को रद्द कर दिया और संबंधित अधिकारियों को जल्द से जल्द नई भर्ती प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया। याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने सरकारी विधि महाविद्यालयों में पर्याप्त शिक्षण संकायों की कमी पर चिंता जताई थी और विधि सचिव को अदालत में पेश होने के लिए तलब भी किया था। तदनुसार, सचिव पेश हुए।
न्यायाधीश ने एसोसिएट प्रोफेसरों के 20 स्वीकृत पदों में से 19 और सहायक प्रोफेसरों के 206 स्वीकृत पदों में से 70 के खाली रहने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने यह भी टिप्पणी की थी कि अगर सरकार संकायों की नियुक्ति करने में सक्षम नहीं है तो कॉलेजों को बंद करना बेहतर है।




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