
केरल राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) ने टाइप 1 मधुमेह से पीड़ित छात्रों के लिए परीक्षा में अतिरिक्त समय की मांग वाली याचिका पर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से रिपोर्ट मांगी है।
आयोग द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि एसएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अलेक्जेंडर थॉमस ने सीबीएसई और सामान्य शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव से एक महीने के भीतर रिपोर्ट मांगी है।
बुशरा शिहाब द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि केरल सरकार पहले से ही एसएसएलसी और प्लस टू परीक्षा में बैठने वाले टाइप 1 मधुमेह से पीड़ित छात्रों के लिए प्रति घंटे 20 मिनट का अतिरिक्त समय प्रदान करती है।
उन्होंने मांग की है कि सीबीएसई परीक्षा में भी यही पैटर्न अपनाया जाए। उन्होंने अपनी याचिका में यह भी कहा कि राज्य में 8,000 से अधिक बच्चे हैं और देश में 8 लाख से अधिक बच्चे टाइप 1 मधुमेह से पीड़ित हैं।
गौरतलब है कि फरवरी 2024 में जारी नियमों में सीबीएसई ने 10वीं और 12वीं के टाइप 1 डायबिटीज पीड़ित स्टूडेंट्स को खाने-पीने संबंधी छूट दी है। ऐसे छात्रों को परीक्षा के दौरान चिकित्सकीय दृष्टि से खान-पान का सामान ले जाने की छूट है। ये छात्र शुगर की टेबलेट, चॉकलेट, कैंडी, केला, सेब, संतरा जैसे फल, सैंडविच जैसे स्नैक आइटम और 500 मिलीलीटर पानी की बोतल पारदर्शी पाउच और बॉक्स में ले जा सकते हैं।
बोर्ड के नियमों के अनुसार, इन सुविधाओं का लाभ उठाने से पहले संबंधित स्टूडेंट को दस्तावेजों के साथ संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय में आवेदन जमा करना होगा। सीबीएसई की अधिकारिक वेबसाइट पर भी ये निर्देश दिए गए हैं।




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