
राष्ट्रीय शिक्षा नीति यानी एनईपी 2020 (NEP 2020) के खिलाफ छात्र फिर एकजुट होने लगे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विरोध में दिल्ली के तालकटोरा इनडोर स्टेडियम में तीन दिवसीय अखिल भारतीय छात्र सम्मेलन का आयोजन किया गया है। ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (एआईडीएसओ) द्वारा आयोजित यह सम्मेलन शुक्रवार 29 नवंबर तक जारी रहेगा।
यह कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 द्वारा उत्पन्न चुनौतियों पर चर्चा करने के लिए छात्रों, शिक्षाविदों और कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाता है। शिक्षा और संस्कृति पर एनईपी के प्रभाव की आलोचना करने के लिए खुले सत्र का मंच बिरसा मुंडा को उनकी विरासत के सम्मान में समर्पित किया गया।
उद्घाटन सत्र में भगत सिंह अभिलेखागार और संसाधन केंद्र के सलाहकार चमन लाल सहित कई प्रमुख वक्ता शामिल हुए, जिन्होंने शिक्षा के निजीकरण और व्यावसायीकरण में तेजी लाने के लिए एनईपी 2020 की आलोचना की। उन्होंने चरित्र निर्माण और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की सांस्कृतिक विरासत पर नीति के प्रभाव पर चिंता व्यक्त की।
एआईडीएसओ के पूर्व अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह ने छात्र आंदोलन के इतिहास पर प्रकाश डाला और कहा, “सम्मेलन को मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया ने बिगड़ती शिक्षा प्रणाली के प्रति जनता के असंतोष को दर्शाया।” सत्र के दौरान प्रख्यात इतिहासकार इरफान हबीब और रोमिला थापर के संदेश भी साझा किये गये।
एआईएसए, एआईएसएफ, एआईएसबी, पीएसयू और एआईडीएसओ सहित विभिन्न वामपंथी और लोकतांत्रिक छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी सत्र को संबोधित किया। शाम को पूरे भारत से सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हुईं, जिसका उद्घाटन कवि और पूर्व सीएसआईआर मुख्य वैज्ञानिक गौहर रज़ा ने किया। इसमें कई प्रदर्शनियों का उद्घाटन भी किया गया।
सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों, एक अकादमिक सेमिनार और एक प्रतिनिधि बैठक के सत्र शामिल होंगे। प्रतिभागियों ने एनईपी 2020 के खिलाफ एकजुट जन आंदोलन का आह्वान किया है।




Add comment