
नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) ने मेडिकल कॉलेजों को नोटिस जारी कर चेतावनी दी है कि अगर वे अपने कॉलेजों में एक मजबूत एंटी-रैगिंग सिस्टम लागू करने में विफल रहे तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि एनएमसी की यह चेतावनी एमबीबीएस के एक 18 वर्षीय छात्र की मौत की दुखद घटना के मद्देनजर आई है, जिसकी कथित तौर पर रैगिंग के कारण मौत हो गई थी।
गौरतलब है कि गुजरात के पाटन जिले के धारपुर में जीएमईआरएस मेडिकल कॉलेज के छात्र अनिल नटवरभाई मेथानिया को कथित तौर पर सीनियर्स द्वारा कथित रैगिंग के तहत 3 घंटे से अधिक समय तक खड़ा रखा गया था, जिसके बाद उसकी मौत हो गई। दुखद घटना का संज्ञान लेते हुए, एनएमसी ने एक एडवाइजरी जारी की, जिसमें सभी संस्थानों से “मजबूत एंटी-रैगिंग सिस्टम लागू करने” के लिए कहा गया।
एनएमसी ने कहा, “ऐसी घटनाएं छात्रों की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के लिए एंटी-रैगिंग उपायों के सख्त लागू करने की तत्काल आवश्यकता को उजागर करती हैं। रैगिंग फिजिकल, मोरल और कानूनी सीमाओं का उल्लंघन करती है और ऐसी घटनाएं संस्थानों की प्रतिष्ठा को भी धूमिल करती हैं।” आयोग ने मेडिकल संस्थानों को यह भी बताया कि उसको अंडरग्रेजुएट (यूजी) और पोस्टग्रेजुएट (पीजी) मेडिकल छात्रों से जुड़ी रैगिंग के बारे में कई शिकायतें मिल रही हैं।
एनएमसी ने कहा, “इन शिकायतों में मानसिक उत्पीड़न और यहां तक कि आत्महत्या की ओर ले जाने वाले मामले भी शामिल हैं। एनएमसी के एंटी-रैगिंग सेल, यूजीसी एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन और सोशल और प्रिंट मीडिया के माध्यम से रिपोर्ट मिलती हैं।” उन्होंने आगे कहा, “आम तौर पर रिपोर्ट की जाने वाली गतिविधियों में अव्यवस्थित आचरण, चिढ़ाना, जबरदस्ती करना और अनुशासनहीन गतिविधियाँ शामिल हैं।”




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