
प्रयागराज में लगने जा रहे विश्व के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन महाकुंभ में इस बार देश-विदेश के 20 से अधिक बड़ी यूनिवर्सिटी व संस्थान रिसर्च के लिए आ रहे हैं। इसमें हार्वर्ड जैसी यूनिवर्सिटी भी शामिल है। महाकुंभ के दौरान, दुनिया और देश भर के 20 से अधिक प्रमुख शैक्षिक संस्थान महाकुंभ से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अध्ययन करने के लिए यहां कैम्प करेंगे। हार्वर्ड, स्टैनफोर्ड, लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, क्योटो यूनिवर्सिटी, AIIMS, IIM अहमदाबाद, IIM बेंगलुरू, IIT कानपुर, IIT मद्रास और जेएनयू जैसे प्रमुख संस्थान अपने प्रोफेसरों, शोधार्थियों और छात्रों को प्रयागराज भेजेंगे।
गौरतलब है कि महाकुंभ 2025, जो 13 जनवरी से 25 फरवरी तक प्रयागराज में आयोजित होगा, न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक धरोहर, आध्यात्मिकता और नवाचार का संगम भी है। इस महोत्सव में करोड़ों श्रद्धालु आएंगे। इसे सफल बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार हर तरीके की तैयारियां कर रही है। इस महाकुंभ के दौरान दुनिया भर से शैक्षणिक संस्थान यहां के अलग-अलग पहलूओं पर रिसर्च करने आएंगे।
प्रमुख सचिव अमृत अभिजात ने लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में बताया कि यह पहली बार है जब हम महाकुंभ के आर्थिक प्रभाव, क्राउड मैनेजमेंट, सामाजिक-सांस्कृतिक पहलुओं, खाद्य वितरण श्रृंखला, एंथ्रोपोलॉजिकल अध्ययन जैसे विभिन्न क्षेत्रों पर इंस्टीट्यूशनल सपोर्ट रिसर्च कर रहे हैं। राज्य सरकार ने आठ विभिन्न क्षेत्रों और विषयों को चुना है, जिन पर शोधकर्ता अध्ययन करेंगे। इस अवसर को वैश्विक सहभागिता के लिए खोलते हुए, शहरी विकास विभाग ने व्यापक अध्ययन कराने का विचार प्रस्तुत किया है।
प्रमुख सचिव ने बताया कि 2019 तक, वैश्विक और घरेलू संस्थान हमसे संपर्क करते थे, लेकिन इस बार हमने शोधकर्ताओं के लिए मेला क्षेत्र को पहले से ही खोलने का निर्णय लिया है। शोध पत्र राज्य सरकार को भविष्य के आयोजनों के लिए आवश्यक सुधार करने में मदद करेंगे। हम शोधकर्ताओं को उनके महाकुंभ में आने के दौरान आवास प्रदान करेंगे और शोध पत्रों की सफल प्रस्तुति पर स्टाइपेंड भी देंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संस्थानों को पहले से आमंत्रित करने का सुझाव दिया था।
शोध के दो प्रमुख क्षेत्र महाकुंभ की योजना और इम्प्लीमेंटेशन तथा महाकुंभ का आर्थिक प्रभाव और परिणाम का अनुमान है। महाकुंभ की योजना और इम्प्लीमेंटेशन श्रेणी में महाकुंभ के आयोजन की पूरी प्रक्रिया, योजना, और उसे लागू करने के तरीके पर अध्ययन किया जाएगा। इसमें यह देखा जाएगा कि इतने बड़े आयोजन के लिए कैसे तैयारी की जाती है और उसे कैसे सफलतापूर्वक अंजाम दिया जाता है। महाकुंभ का आर्थिक प्रभाव और परिणाम का अनुमान श्रेणी में यह अध्ययन किया जाएगा कि महाकुंभ के आयोजन का स्थानीय और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ता है। इसमें पर्यटकों द्वारा किए गए खर्च, सरकार की ओर से किए गए निवेश और इसके लंबे समय तक के आर्थिक प्रभावों का अनुमान लगाया जाएगा।
पर्यटकों द्वारा विभिन्न श्रेणियों में खर्च जैसे आवास, भोजन, परिवहन, धार्मिक गतिविधियां और मनोरंजन, महाकुंभ के परिणाम का अनुमान लगाने में मदद करेंगे। साथ ही, राज्य और केंद्रीय सरकार द्वारा किए गए खर्चे पर अध्ययन यह बताएगा कि महाकुंभ के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में किस तरह का योगदान रहा है।
पॉप-अप शहर, जो तंबू, पोंटून और बांस स्ट्रक्चर का उपयोग करके बनाया जाएगा, लाखों तीर्थयात्रियों को आवास प्रदान करेगा और महाकुंभ खत्म होने के बाद इन स्ट्रक्चर को पूरी तरह से हटा दिया जाएगा। यह अस्थायी बस्ती सभी प्रकार की सुविधाओं से लैस होगी, जिसमें स्थानिक जोनिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर आपूर्ति, खाद्य वितरण नेटवर्क और सार्वजनिक सभा स्थल शामिल होंगे।
प्रयागराज, जिसकी आबादी 5.5 मिलियन है, के लिए 400 मिलियन विजिटर्स का स्वागत करना एक अभूतपूर्व चुनौती और अवसर प्रस्तुत करता है, जो संस्थानों के लिए हमेशा आकर्षण का केंद्र रहा है। यह भव्य आयोजन हर 12 साल में तब मनाया जाता है जब सूर्य, चंद्रमा और गुरु एक विशेष आकाशीय स्थिति में एकत्र होते हैं।




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