
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी राज्यों के शिक्षा सचिव और विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को पत्र लिखकर स्नातक पाठ्यक्रमों में पर्यावरण विषय को अनिवार्य रूप से शामिल करने की सूचना दी है। यह कदम सर्वोच्च अदालत के निर्देशों के तहत उठाया गया है।
यूजीसी के पत्र में उल्लेख किया गया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत पर्यावरण शिक्षा पर आधारित एक पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। इसमें केवल कक्षा में पढ़ाई ही नहीं, बल्कि फील्डवर्क और केस स्टडी भी शामिल होंगी। यह पाठ्यक्रम छात्रों को पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
एनईपी 2020 के अनुसार पर्यावरण शिक्षा को अत्यधिक महत्वपूर्ण माना गया है। सर्वोच्च अदालत के आदेशों के बाद, यूजीसी ने पर्यावरण शिक्षा पर आधारित पाठ्यक्रम विशेषज्ञों से तैयार कराया है, जिसमें जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छता, जैविक विविधता का संरक्षण, वन्य जीवन संरक्षण और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल किए गए हैं।
स्नातक पाठ्यक्रम में पर्यावरण शिक्षा के तहत कुल नौ विषयों को जोड़ा गया है, जिनमें से एक विषय के लिए चार घंटे और अन्य छह-छह घंटे का समय निर्धारित किया गया है। कुल मिलाकर, इन विषयों के लिए छात्रों को 30 घंटे की क्लासरूम स्टडी करनी होगी और एक सेमेस्टर में एक क्रेडिट हासिल करना आवश्यक होगा।




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