
नव सूचना संचार तकनीकी माध्यमों ने हिन्दी भाषा की विकास यात्रा को समृद्ध किया है, इसमें डिजिटल साहित्य व डिजिटल माध्यमों के योगदान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। डिजिटल की इस क्रांति ने हिन्दी भाषा के विकास में अपनी अहम भूमिका का निर्वाह किया है। उक्त विचार डॉ. हंसराज सुमन ने हिन्दी की विकास यात्रा में डिजिटल माध्यमों का योगदान विषय पर अरबिंदो कॉलेज में छात्रों को संबोधित करते हुए कहे। डॉ. हंसराज सुमन ने “हिन्दी भाषा सम्प्रेषण और संचार” विषय पर अपना व्याख्यान देते हुए कहा कि हिन्दी का क्षेत्र अब पुस्तकों और पत्र-पत्रिकाओं तक ही सीमित नहीं रहा है बल्कि वह इंटरनेट, ब्लॉग, पॉडकास्ट, ई-पुस्तकें, सोशल मीडिया, वेब सीरीज और ओटीटी प्लेटफॉर्म के माध्यम से हर व्यक्ति तक प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिये पहुँच रही है, यही हिन्दी की ताकत है जो अपनी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुकी है ।
डॉ. हंसराज सुमन ने अपने वक्तव्य में बताया कि पहले हमें हिन्दी साहित्य पुस्तकों, समाचार पत्र -पत्रिकाओं में मिलता था मगर अब यह हर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आसानी से उपलब्ध है। डिजिटल साहित्य को पाठकों तक पहुंचाने में तमाम ऐसे रचनाकार है जो अपनी रचनाओं को ब्लॉग, सोशल मीडिया और वेबसाइटों के द्वारा आम पाठकों तक पहुंचा रहे हैं तथा उससे पैसा कमा रहे हैं। उन्होंने बताया कि हिन्दी समय, हंस और गूगल बुक्स जैसी डिजिटल लाइब्रेरी ने हिन्दी साहित्य को पाठक वर्ग तक पहुंचाने में मदद की है। इसी तरह से अनेक ऐसे प्लेटफॉर्म है जहाँ पर हिन्दी साहित्य को सुनने का अवसर प्रदान कर रहे हैं, उनमें स्टोरीटेल, कुकू एफएम और ऑडिबल जैसे प्लेटफॉर्म है।
डॉ. सुमन ने अपने संबोधन में छात्रों को जानकारी देते हुए बताया कि फेसबुक, वाट्सअप, यूट्यूब, ट्विटर और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर हिन्दी में लेखन, कहानी, कविता, आलोचना, समीक्षा और संवाद लेखन की प्रक्रिया तेजी से बढ़ी है। उन्होंने बताया कि आज हिन्दी के बहुत से लेखक, आलोचक, कवि और वर्तमान में उभरते युवा कवियों ने सोशल मीडिया पोस्ट, इंस्टाग्राम रिल्स और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से अपनी रचनाओं को साझा कर रहे हैं, जिसे देख कर आज की पीढ़ी प्रोत्साहित हो रही है। उन्होंने यह भी बताया कि डिजिटल समाचार पोर्टल ने हिन्दी पत्रकारिता को आगे बढ़ाने में विशेष योगदान दिया है।
डॉ. हंसराज सुमन ने हिन्दी भाषा सम्प्रेषण और संचार माध्यमों की व्याख्या करते हुए कहा कि ओटीटी तथा वेब सीरिज हिन्दी फिल्मों को बढ़ावा दे रही हैं। वेब सीरिज, शॉर्ट फिल्में और वृत्तचित्रों की बढ़ती लोकप्रियता ने हिन्दी कंटेंट को सुदृढ़ किया है। उन्होंने जानकारी दी कि नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम, जी 5 और एमएक्स प्लेयर जैसी ओटीटी सेवाओं ने हिन्दी फिल्मों को आगे बढ़ाया है। साथ ही डिजिटल माध्यमों ने हिन्दी भाषा को एक ऐसी ऊर्जा दी है जो न केवल लेखन में बल्कि पढ़ने में भी मदद मिली है। यही कारण है कि हिन्दी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर वैश्विक पहचान मिली है जिससे डिजिटल युग में हिन्दी पहले से कहीं ज्यादा समृद्ध हुई है, आने वाला समय डिजिटल हिन्दी का होगा। कार्यक्रम में बहुत से छात्रों ने डिजिटल माध्यमों के योगदान और उनके प्रयोग के विषय में अपनी जिज्ञासा प्रकट की और सवाल पूछे। सवाल पूछने वाले छात्रों में पावस चौधरी, कु.स्नेहा, कु.अदिति, विवेक कुमार, सिद्धार्थ व वासुदेव आदि थे। डॉ .सुमन ने उसका भी उत्तर देकर छात्रों को संतुष्ट किया।




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