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 इलाहाबाद हाई कोर्ट ने की फीस वृद्धि के लिए निजी मेडिकल कॉलेज की निंदा, कहा- यह कानून का दुरुपयोग

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने फीस वृद्धि के मामले में मथुरा के कृष्ण मोहन (KM) मेडिकल कॉलेज की निंदा की है और इसे “कानून का दुरुपयोग” करार दिया है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के निजी व्यावसायिक शैक्षणिक संस्थान (प्रवेश का विनियमन और शुल्क निर्धारण) अधिनियम के तहत एक अपीलीय प्राधिकरण के आदेश को खारिज कर दिया, जिसने कॉलेज को छात्रों पर अत्यधिक शुल्क बढ़ाने की अनुमति दी थी।

न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव की एकल पीठ द्वारा दिए गए फैसले में इस आदेश को “अस्थिर” और “कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग” कहा गया। कोर्ट ने पाया कि छात्रों को यूपी निजी व्यावसायिक शैक्षणिक संस्थान अधिनियम के तहत कॉलेज द्वारा मांगी गई फीस से अधिक शुल्क देने के लिए मजबूर किया गया था।

कोर्ट ने कहा, “यह स्पष्ट है कि छात्रों ने कॉलेज द्वारा दावा की गई फीस से अधिक भुगतान किया है, और इसलिए विवादित आदेश कायम नहीं रह सकता।” कॉलेज की कानूनी कार्यवाही की आलोचना करते हुए न्यायालय ने कहा कि कॉलेज ने अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष बिना खुलासा किए एक ही मामले में कई रिट याचिकाएँ दायर की थीं। “एक ही कारण पर दो रिट याचिकाएँ दायर करना कॉलेज की ओर से घोर लापरवाही और कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है,” कोर्ट ने कहा।

इसके अलावा, कोर्ट ने कॉलेज के इस दावे को भी खारिज कर दिया कि छात्रों ने स्वेच्छा से बढ़ी हुई फीस का भुगतान करने का वचन दिया था। कोर्ट ने निर्णय में कहा, “छात्रों का वचन उनकी स्वतंत्र इच्छा से नहीं, बल्कि एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश खोने के डर से दिया गया था।”

इस फैसले के बाद, कॉलेज को छात्रों पर सरकार द्वारा निर्धारित शुल्क दर से अधिक शुल्क वृद्धि लगाने से रोका गया है। यह मामला 2019 बैच के एमबीबीएस छात्रों द्वारा दायर याचिका से संबंधित था, जिन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने कॉलेज से इंटर्नशिप के लिए 12,000 रुपये प्रति माह का वजीफा मांगा, तो कॉलेज ने उनकी फीस 8.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 11.5 लाख रुपये कर दी।

छात्रों ने याचिका में आरोप लगाया था कि यह वृद्धि उनकी काउंसलिंग के समय की फीस से अधिक थी। यह मामला 24 जनवरी को कोर्ट में सुलझाया गया।

 

 

Asmita Sarkar

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