
अखिल भारतीय छात्र संघ (AISF) ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के भवन तक विरोध मार्च निकाला और यूजीसी विनियम 2024-25 के मसौदे को तत्काल रद्द करने की मांग की। संगठन ने इन प्रस्तावित नियमों को संवैधानिक सिद्धांतों के खिलाफ और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर खतरा बताया।
छात्र संगठन का विरोध AISF के राष्ट्रीय अध्यक्ष विराज देवांग और महासचिव दिनेश सीरंगराज के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन में छात्रों ने नए नियमों को शिक्षा नीति के लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया। संगठन के आधिकारिक बयान के अनुसार, जनवरी में जारी किए गए ये मसौदा नियम 2018 के मौजूदा दिशानिर्देशों को बदलने और संकाय नियुक्ति एवं शैक्षणिक योग्यता के मानकों में संशोधन करने का प्रयास कर रहे हैं।
केंद्र और राज्यों के बीच टकराव केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का तर्क है कि इन नए दिशा-निर्देशों से विश्वविद्यालयों को नियुक्तियों और पदोन्नति में अधिक लचीलापन मिलेगा। हालांकि, कई गैर-भाजपा शासित राज्यों ने इसका विरोध करते हुए इसे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर हमला बताया है। राज्यों का आरोप है कि ये नियम उनके अधिकारों को कमजोर करने और उच्च शिक्षा संस्थानों को केंद्र के अधीन लाने का प्रयास हैं।
सबसे बड़ा विवाद राज्यपालों की भूमिका को लेकर है, क्योंकि नए नियमों के तहत विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति में राज्यपाल की भूमिका बढ़ जाएगी, जिससे राज्य सरकारों का प्रभाव सीमित हो सकता है।
AISF और AIYF का प्रदर्शन AISF ने नए नियमों को शिक्षकों, छात्रों और अकादमिक निकायों की भूमिका को कमजोर करने वाला बताया और प्रशासनिक केंद्रीकरण का आरोप लगाया। अखिल भारतीय युवा महासंघ (AIYF) के सदस्य भी इस विरोध में शामिल हुए। AISF और AIYF के प्रतिनिधियों ने UGC के संयुक्त सचिव एन. गोपुकुमार को ज्ञापन सौंपकर मसौदा नियमों को वापस लेने की मांग की।
AISF का मानना है कि यूजीसी, जो एक परामर्शदात्री निकाय है, को ऐसे अधिकार दिए जा रहे हैं जिससे वह विश्वविद्यालयों पर वित्तीय दंड लगाने और अनुदान रोकने जैसे फैसले ले सके। इससे राज्य सरकारों की उच्च शिक्षा पर पकड़ कमजोर हो जाएगी।
विरोध तेज करने की चेतावनी AISF ने नए नियमों को लोकतांत्रिक सिद्धांतों के विरुद्ध बताते हुए कहा कि इसमें शिक्षकों, छात्रों और अकादमिक परिषदों की भागीदारी को नजरअंदाज किया गया है। संगठन ने इसे शिक्षा क्षेत्र में नौकरशाही नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश बताया।
AISF ने स्पष्ट रूप से इन नियमों को पूरी तरह अस्वीकार कर दिया है और राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने नए मसौदे को वापस नहीं लिया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
AISF ने छात्रों, शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों से अपील की है कि वे इस संघर्ष में शामिल हों और उच्च शिक्षा की स्वायत्तता को बचाने के लिए एकजुट हों। संगठन का मानना है कि यदि ये नए नियम लागू हुए, तो राज्य सरकारों और विश्वविद्यालयों की स्वतंत्रता समाप्त हो जाएगी और केंद्र सरकार का हस्तक्षेप बढ़ जाएगा।




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