
सीबीएसई अपने विदेशी स्कूलों के लिए वैश्विक पाठ्यक्रम तैयार करने में सक्रिय रूप से कार्यरत है। इस नए पाठ्यक्रम को न केवल अन्य अंतरराष्ट्रीय स्कूलों बल्कि देश में सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में भी लागू किए जाने का प्रस्ताव है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से इसे प्रारंभ करने की योजना बनाई गई है।
विस्तृत कार्य योजना के निर्देश
पिछले सप्ताह केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने एक बैठक में सीबीएसई अधिकारियों को इस वैश्विक पाठ्यक्रम के लिए विस्तृत कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए। सीबीएसई के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत यह पाठ्यक्रम छात्रों को अधिक लचीलापन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है। यह नया पाठ्यक्रम विशेष रूप से सीबीएसई के विदेशी स्कूलों में लागू किया जाएगा।
2010 में भी हुआ था पायलट कार्यक्रम
इससे पहले 2010 में एक पायलट कार्यक्रम के तहत इसे कुछ चयनित भारतीय और विदेशी स्कूलों में लागू किया गया था। हालांकि, परिचालन संबंधी चुनौतियों और सीमित स्वीकृति के कारण इसे वर्ष 2017 में बंद कर दिया गया।
नए वैश्विक पाठ्यक्रम को भारत और विदेशों में भारतीय मूल्यों के साथ अंतरराष्ट्रीय शिक्षा की मांग रखने वाले छात्रों के लिए तैयार किया गया था। इसमें अनुसंधान-आधारित परियोजनाओं, संचार कौशल और महत्वपूर्ण सोच पर विशेष ध्यान दिया गया था।
अंतरराष्ट्रीय बोर्डों के बीच प्रतिस्पर्धा में कमी
सीबीएसई के अधिकारी के अनुसार, यह नया पाठ्यक्रम कैम्ब्रिज इंटरनेशनल और इंटरनेशनल बैकलॉरिएट जैसे वैश्विक बोर्डों के साथ प्रतिस्पर्धा को कम करेगा। इसमें सीबीएसई का स्थानीय पाठ्यक्रम भी शामिल होगा और कई तत्वों को राष्ट्रीय पाठ्यक्रम में समाहित किया जाएगा।
इसके पीछे मुख्य विचार यह है कि एनसीईआरटी पाठ्यक्रम और अंतरराष्ट्रीय बोर्डों द्वारा प्रस्तावित पाठ्यक्रम के बीच एक संतुलन स्थापित किया जाए। वर्तमान में सीबीएसई द्वारा कोई अंतरराष्ट्रीय पाठ्यक्रम नहीं पेश किया जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्कूल आमतौर पर सीआई, आईबी या काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन से संबद्ध होते हैं।




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